Class 9 Hindi - HARYANA
Supplementary: Reedh ki Haddi
कक्षा नौवीं की हरियाणा बोर्ड (BSEH) की पाठ्यपुस्तक का यह पाठ 'रीढ़ की हड्डी' जगदीश चंद्र माथुर द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध एकांकी है। यह एकांकी समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच, स्त्री शिक्षा के महत्व और विवाह जैसी सामाजिक प्रक्रिया में लड़का-लड़की की समानता पर करारा व्यंग्य करती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक लड़की के पिता को अपनी बेटी के विवाह के लिए उसकी उच्च शिक्षा को छुपाना पड़ता है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके प्रश्न विद्यार्थियों को समाज सुधार और स्त्री अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ चरित्र चित्रण और शीर्षक की सार्थकता पर आधारित होते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
एकांकी विधा
एकांकी नाटक का एक संक्षिप्त रूप होता है जिसमें जीवन के किसी एक ही महत्वपूर्ण पहलू या घटना को एक ही अंक में प्रस्तुत किया जाता है।
रीढ़ की हड्डी का प्रतीकात्मक अर्थ
पाठ में 'रीढ़ की हड्डी' आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और रीढ़ सीधे खड़े होने के प्रतीक के रूप में उपयोग की गई है, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व की कमजोरी को दर्शाती है।
स्त्री शिक्षा का महत्व
एकांकी यह संदेश देता है कि महिलाओं का शिक्षित होना समाज के विकास के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि पुरुषों का।
सामाजिक रूढ़िवादिता
लड़की देखने आने वालों की संकीर्ण मानसिकता और पुराने विचारों पर यह पाठ कड़ा प्रहार करता है।
पात्र परिचय (उमा)
उमा इस एकांकी की मुख्य नायिका है जो शिक्षित, साहसी और अपने आत्मसम्मान के प्रति जागरूक लड़की है।
Important Formulas
Board Exam Info
हरियाणा बोर्ड (BSEH) की परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से शीर्षक की सार्थकता, उमा का चरित्र चित्रण, और पाठ के संदेश पर आधारित लघु उत्तरीय तथा निबंधात्मक प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
इस एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' क्यों रखा गया है?
यह शीर्षक व्यंग्यात्मक है जो गोपाल प्रसाद और उनके पुत्र रामस्वरूप जैसे लोगों के बेईमान, रीढ़हीन (आत्मसम्मानहीन) और कमजोर व्यक्तित्व को दर्शाता है जो समाज में दोहरे मापदंड अपनाते हैं।
उमा ने रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद के सामने क्या सच्चाई रखी?
उमा ने गोपाल प्रसाद के उस वैचारिक पाखंड का पर्दाफाश किया जो उच्च शिक्षा प्राप्त लड़कियों को कम आंकते हैं और उसने अपनी शिक्षा तथा आत्मसम्मान का खुलकर परिचय दिया।
इस पाठ से हमें क्या मुख्य प्रेरणा मिलती है?
यह पाठ हमें नारी शिक्षा का समर्थन करने, सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता है।
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