Class 9 Hindi - HARYANA
Poetry: Sawaiyon se
कक्षा 9 हरियाणा बोर्ड (BSEH) की हिंदी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'सवैये' रसखान द्वारा रचित अत्यंत महत्वपूर्ण काव्य खंड है। इस अध्याय में कवि रसखान का श्री कृष्ण और उनकी भूमि ब्रज के प्रति अनन्य प्रेम, भक्ति और समर्पण भाव स्पष्ट रूप से झलकता है। सवैया एक विशिष्ट वर्णिक छंद है, जिसकी अपनी एक लय, तुकबंदी और संगीतमयता होती है। बोर्ड परीक्षाओं की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें से सवैया छंद की विशेषताएँ, कवि का परिचय, और काव्यांशों के भावार्थ तथा व्याख्या से संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं, जो विद्यार्थियों को अच्छे अंक दिलाने में सहायक हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
सवैया छंद का परिचय
सवैया एक प्रकार का वर्णिक छंद है जिसमें 22 से 26 वर्ण होते हैं और इसमें सवैया की अपनी एक विशिष्ट लय और तुकबंदी होती है।
रसखान का कृष्ण भक्ति प्रेम
कवि रसखान मुसलमान होते हुए भी भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे और उनका हर जन्म ब्रजभूमि में ही बीतने की कामना थी।
ब्रजभूमि के प्रति आकर्षण
कवि श्री कृष्ण से जुड़ी हर वस्तु जैसे लाठी, कंबल, और गोवर्धन पर्वत के पत्थरों से प्रेम करते हैं क्योंकि उनका संबंध कृष्ण से है।
गोपियों का कृष्ण प्रेम और विवशता
अंतिम सवैये में गोपियों की कृष्ण की मुरली की धुन और उनकी मुस्कान के प्रति दीवानगी का वर्णन किया गया है जिससे वे खुद को संभाल नहीं पातीं।
ब्रज भाषा का प्रयोग
इन सवैयों में अत्यंत मधुर, सहज और प्रभावमयी ब्रजभाषा का प्रयोग किया गया है जो मन को मोह लेती है।
Important Formulas
Board Exam Info
हरियाणा बोर्ड (BSEH) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से लगभग 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य रूप से काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ, और कवि के कृष्ण-प्रेम से जुड़े लघु उत्तरीय प्रश्न परीक्षा में आते हैं।
Frequently Asked Questions
सवैया छंद किसे कहते हैं?
सवैया एक वर्णिक छंद है जिसमें 22 से 26 वर्ण होते हैं और यह कविता की तरह लयबद्ध गाया जाता है।
रसखान अगले जन्म में क्या बनना चाहते हैं और क्यों?
रसखान अगले जन्म में ब्रजभूमि में ग्वाला, पत्थर, पक्षी या गाय बनना चाहते हैं क्योंकि वे हर रूप में कृष्ण के निकट रहना चाहते हैं।
गोपियाँ कृष्ण की किस चीज़ से खुद को असहाय पाती हैं?
गोपियाँ कृष्ण की मनमोहक मुस्कान (मुस्कान की मन्द मुस्कान) के सामने पूरी तरह विवश हो जाती हैं।
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