Class 9 Hindi - UP

Supplementary: Reedh ki Haddi

‘रीढ़ की हड्डी’ जगदीश चंद्र माथुर द्वारा लिखित एक बहुत ही रोचक और वैचारिक एकांकी है। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य समाज में स्त्री-शिक्षा के महत्व को स्थापित करना और विवाह जैसी सामाजिक प्रक्रिया में लड़का और लड़की पक्ष की रूढ़िवादी सोच पर करारा व्यंग्य करना है। यह नाटक हमें सिखाता है कि महिलाओं का आत्मसम्मान, शिक्षा और उनके व्यक्तित्व का स्वतंत्र होना समाज की प्रगति के लिए कितना आवश्यक है। यूपी बोर्ड (UPMSP) की परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे चरित्र चित्रण, उद्देश्य और पाठ के संदेश पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

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Key Concepts

एकांकी का अर्थ

एकांकी नाटक का ही एक संक्षिप्त रूप होता है जिसमें जीवन के किसी एक ही मुख्य प्रसंग या घटना को एक ही अंक में प्रस्तुत किया जाता है।

रीढ़ की हड्डी का प्रतीकात्मक अर्थ

पाठ के शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' का अर्थ रीढ़ विहीन यानी रीढ़ की हड्डी के बिना होना है, जो गोपालप्रसाद और रामस्वरूप जैसे चरित्रों की अदूरदर्शिता और रीढ़हीनता को दर्शाता है जो अपने अधिकारों के लिए खड़े नहीं हो पाते।

उमा का चरित्र

उमा इस एकांकी की मुख्य नायिका है जो शिक्षित, साहसी और स्पष्टवक्ता है। वह विवाह के समय लड़की के दिखाए जाने वाले अपमानजनक तरीके का खुलकर विरोध करती है।

रामस्वरूप की लाचारी

रामस्वरूप एक आधुनिक सोच वाले पिता हैं लेकिन समाज के दबाव में आकर वे अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाने की कोशिश करते हैं, जो उनकी कमजोरी को दिखाता है।

गोपालप्रसाद की रूढ़िवादी सोच

गोपालप्रसाद एक ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं जो लड़कों की उच्च शिक्षा को तो महत्व देते हैं लेकिन लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा को अनावश्यक और हानिकारक मानते हैं।

Important Formulas

स्त्री शिक्षा = समाज के विकास की मूल नींव
आत्मसम्मान + निर्भिकता = एक सशक्त व्यक्तित्व
रूढ़िवादी सोच + ढकोसला = सामाजिक पतन

Board Exam Info

उत्तर प्रदेश (UPMSP) कक्षा 9 हिंदी परीक्षा में इस पाठ से लगभग 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य रूप से पाठ का सारांश, उमा का चरित्र चित्रण, शीर्षक की सार्थकता और लघु उत्तरीय प्रश्न परीक्षा में बार-बार आते हैं।

Frequently Asked Questions

इस एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' व्यंग्यात्मक रूप से रखा गया है। यह उन लोगों पर कटाक्ष है जो रीढ़विहीन हैं यानी जिनमें व्यक्तित्व, दृढ़ निश्चय और आत्मनिर्भरता की कमी है, जैसे रामस्वरूप और गोपालप्रसाद।

इस एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' व्यंग्यात्मक रूप से रखा गया है। यह उन लोगों पर कटाक्ष है जिनके पास अपना कोई दृढ़ व्यक्तित्व या नैतिक बल नहीं होता, जैसे गोपालप्रसाद और रामस्वरूप जो समाज के सामने झुक जाते हैं।

उमा ने शंकर और उसके पिता को क्या जवाब दिया?

उमा ने शंकर के चरित्र की पोल खोलते हुए बताया कि वह लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटते हुए पकड़ा जा चुका है और उसका कोई वास्तविक नैतिक चरित्र नहीं है।

रामस्वरूप अपनी बेटी की शिक्षा की बात क्यों छिपाते हैं?

रामस्वरूप रूढ़िवादी समाज के डर से अपनी बेटी की बीए (उच्च शिक्षा) की बात छिपाते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि अधिक पढ़ी-लिखी लड़की होने पर लड़के वाले विवाह से मना कर सकते हैं।

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