Class 9 Hindi - BIHAR

Supplementary: Mati Wali

कक्षा 9 बिहार बोर्ड (BSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक (गोतमी भाग 1) का पूरक पाठ 'माटी वाली' एक अत्यंत मार्मिक और संवेदनशील कहानी है। विख्यात लेखिका विद्या सागर नौटियाल द्वारा रचित यह कहानी विस्थापन के दर्द, भूख और गरीब मजदूरों की दुर्दशा को बहुत ही प्रभावी ढंग से दर्शाती है। कहानी की मुख्य पात्र एक गरीब वृद्ध महिला है जो शहर के घरों में लाल मिट्टी पहुँचाकर अपना और अपने बीमार पति का पेट भरती है। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से यह अध्याय नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनाओं और चरित्र चित्रण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

माटी वाली का परिचय

माटी वाली एक गरीब बुढ़िया है जो टिहरी शहर के लोगों के घरों में चूल्हों की पुताई के लिए लाल मिट्टी पहुँचाने का काम करती है।

विस्थापन की समस्या

टिहरी बाँध के निर्माण के कारण शहर के डूबने की स्थिति में वहाँ के गरीबों और विस्थापितों के सामने रोजी-रोटी और आवास का गंभीर संकट पैदा हो जाता है।

गरीबी और लाचारी

माटी वाली और उसके बीमार पति के पास अपनी जमीन या पक्का मकान नहीं है, और केवल माटी बेचने से मिलने वाले पैसों पर ही उनका जीवन निर्भर है।

माटी का महत्व

टिहरी शहर के लोगों के लिए माटी सिर्फ एक वस्तु नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और चूल्हे की पवित्रता से जुड़ी हुई जरूरत है।

कहानी का संदेश

यह पाठ हमें विकास के नाम पर उजाड़े जाने वाले गरीबों के प्रति सहानुभूति रखने और उनकी पीड़ा को समझने की प्रेरणा देता है।

Important Formulas

विस्थापन = अपने मूल निवास स्थान को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर बसने के लिए मजबूर होना
रचनाकार = विद्या सागर नौटियाल
मुख्य पात्र = माटी वाली

Board Exam Info

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 9 की परीक्षाओं में इस अध्याय से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से माटी वाली का चरित्र चित्रण, कहानी का मुख्य उद्देश्य, और विस्थापन के दर्द से संबंधित लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

माटी वाली शहर के घरों में क्या पहुँचाने का काम करती थी?

माटी वाली शहर के घरों में चूल्हा पुतने के लिए लाल मिट्टी पहुँचाने का काम करती थी।

टिहरी बाँध बनने से क्या समस्या उत्पन्न हुई?

टिहरी बाँध बनने से पूरा शहर जलमग्न होने लगा, जिससे गरीब लोगों और माटी वाली के सामने अपने घर-बार और रोजगार को छोड़कर विस्थापित होने का संकट खड़ा हो गया।

इस पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के रचयिता प्रसिद्ध साहित्यकार विद्या सागर नौटियाल जी हैं।

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