Class 9 Hindi - BIHAR
Poetry: Vaakh
कक्षा 9 बिहार बोर्ड (BSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'गोधा भाग 1' में संकलित 'वाख्' कश्मीरी भाषा की प्रसिद्ध संतवयत्री ललद्यद द्वारा रचित हैं। 'वाख्' का शाब्दिक अर्थ 'वाणी' है। इन वाखों के माध्यम से कवयत्री ने बाह्य आडंबरों, पाखंडों का विरोध किया है और ईश्वर भक्ति, प्रेम, समानता तथा आत्म-ज्ञान का संदेश दिया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पद्यांश की व्याख्या (संदर्भ सहित) और कवयत्री के जीवन से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। यह छात्रों को नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक गहराई सिखाता है।
Start Learning FreeKey Concepts
वाख् का अर्थ
वाख् ललद्यद की लोकप्रिय शैली है, जो हिंदी के दोहे या पद की तरह चार पंक्तियों में लिखी जाती है और इसमें जीवन के दार्शनिक विचार होते हैं।
कवयत्री ललद्यद का परिचय
ललद्यद कश्मीरी भाषा की महान संत कवयत्री थीं, जिन्हें कश्मीर में 'लल्लेश्वरी', 'लला' या 'ललारिफा' के नाम से भी जाना जाता है।
भक्ति और बाह्य आडंबरों का विरोध
पहले वाख् में कवयत्री ने कच्चे धागे की रस्सी से जीवन की नश्वरता को बताया है और ईश्वर प्राप्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों के कमजोर होने की बात कही है।
समभाव की अनिवार्यता
दूसरे और तीसरे वाख् में मन को नियंत्रित करने (संयमी बनने) और अंतःकरण को खुले रखने पर जोर दिया गया है, जिससे मनुष्य में अहंकार समाप्त होता है।
शिव (ईश्वर) की सर्वव्यापकता
चौथे वाख् में कवयत्री ने बताया है कि ईश्वर घट-घट में बसता है, इसलिए हिंदू-मुसलमान का भेद नहीं करना चाहिए और ज्ञानी वही है जो खुद को पहचानता है।
Important Formulas
Board Exam Info
बिहार बोर्ड (BSEB) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य रूप से वाखों की सप्रसंग व्याख्या, कवयत्री का परिचय और पाठ के अंत में दिए गए अभ्यास प्रश्न परीक्षा में आते हैं।
Frequently Asked Questions
कवयत्री ललद्यद ने 'कच्चे धागे की डोरी' मनुष्य के शरीर और उसके जीवन की नश्वर और कमजोर साँसों को कहा है, जिससे वह प्रभु-भक्ति का प्रयास कर रही है।
कवयत्री ने मनुष्य के शरीर और जीवन की कमजोर और नश्वर साँसों को 'कच्चे धागे की डोरी' कहा है जिसके सहारे वह जीवन जी रही है।
ललद्यद के 'वाख्' का मुख्य संदेश क्या है?
ललद्यद के वाख् का मुख्य संदेश बाह्य आडंबरों और धार्मिक भेदों को छोड़कर सच्चे मन से ईश्वर की भक्ति करना और आत्म-ज्ञान प्राप्त करना है।
सच्चा ज्ञानी किसे कहा गया है?
पाठ के अनुसार, सच्चा ज्ञानी वह है जो हिंदू-मुसलमान का भेद मिटाकर सबसे पहले स्वयं को (अपने अंतःकरण को) पहचानता है क्योंकि उसी में ईश्वर का वास है।
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