Class 9 Hindi - BIHAR

Poetry: Sawaiyon se

कक्षा 9 बिहार बोर्ड (BSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक के अंतर्गत 'सवैयां से' अध्याय रसखान द्वारा रचित अत्यंत महत्वपूर्ण काव्य अंश है। इस अध्याय में रसखान जी की भगवान कृष्ण और उनकी भूमि ब्रज के प्रति अनन्य भक्ति, प्रेम और समर्पण भाव को बहुत ही सुंदर ढंग से सवैया छंद में प्रस्तुत किया गया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कवियों के परिचय और पाठ पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं, जो छात्रों को अच्छे अंक दिलाने में मदद करते हैं।

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Key Concepts

सवैया छंद की विशेषता

सवैया एक वर्णिक वृत्त छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 22 से 26 वर्ण होते हैं और इसमें संगीतात्मकता व लयबद्धता पाई जाती है।

रसखान की कृष्ण भक्ति

कवि रसखान मुसलमान होने के बावजूद कृष्ण के अनन्य भक्त थे और वे हर जन्म में ब्रज भूमि में ही जन्म लेना चाहते थे।

ब्रज भूमि के प्रति प्रेम

कवि कृष्ण से जुड़ी हर वस्तु जैसे लकुटी (लाठी), कामरिया (कमंबल) और ब्रज के ग्वालों के साथ रहने के लिए तीनों लोकों का सुख त्यागने को तैयार हैं।

गोपियों की विवशता और मुरली प्रेम

गोपियां कृष्ण की मुरली से ईर्ष्या करती हैं क्योंकि मुरली ने कृष्ण को उनसे दूर कर रखा है, फिर भी वे कृष्ण की मुस्कान के आगे विवश हो जाती हैं।

काव्य सौंदर्य और भाषा

इस पाठ में ब्रज भाषा का अत्यंत मधुर, सहज और प्रभावोत्पादक प्रयोग किया गया है जिसमें अनुप्रास अलंकार की प्रधानता है।

Important Formulas

सवैया छंद: एक वर्णिक छंद जिसमें 22 से 26 वर्ण होते हैं।
ब्रज भाषा: रसखान द्वारा प्रयुक्त मुख्य काव्य भाषा।
भक्ति रस: इस काव्य का प्रमुख रस।

Board Exam Info

बिहार बोर्ड (BSEB) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या (व्याख्यात्मक प्रश्न), कवि रसखान का जीवन परिचय और पाठ से संबंधित लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल होते हैं।

Frequently Asked Questions

कवि रसखान अगले जन्म में क्या-क्या बनना चाहते हैं?

कवि रसखान अगले जन्म में ब्रज के गोकुल में ग्वाला, पत्थर, पक्षी या नदी के रूप में जन्म लेना चाहते हैं ताकि वे हमेशा कृष्ण के समीप रह सकें।

गोपियां कृष्ण की किस चीज़ से सौगंध खाकर हार जाती हैं?

गोपियां कृष्ण की मुरली की धुन और उनकी मोहनी मुस्कान के आगे अपनी विवशता प्रकट करती हैं और कहती हैं कि कृष्ण की मुस्कान संभालना उनके बस में नहीं है।

रसखान की रचनाओं की भाषा क्या है?

रसखान की रचनाओं की मुख्य भाषा 'ब्रज भाषा' है जो बहुत ही सरल, मधुर और प्रवाहमयी है।

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