Class 9 Hindi - BIHAR
Supplementary: Reedh ki Haddi
कक्षा 9 बिहार बोर्ड (BSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'गोधूलि भाग 1' का यह पूरक पाठ 'रीढ़ की हड्डी' जगदीश चंद्र माथुर द्वारा लिखित एक अत्यंत महत्वपूर्ण एकांकी है। यह नाटक समाज की सड़ी-गली रूढ़ियों, पितृसत्तात्मक सोच और नारी शिक्षा के महत्व पर प्रहार करता है। कहानी विवाह जैसे गंभीर सामाजिक अनुष्ठान में लड़की के प्रति दोहरी मानसिकता और रूढ़िवादी सोच को उजागर करती है। परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चरित्र चित्रण और सामाजिक संदेश से संबंधित दीर्घ उत्तरीय और लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
रीढ़ की हड्डी (शीर्षक का अर्थ)
इस नाटक में 'रीढ़ की हड्डी' स्वावलंबन, आत्मसम्मान और रीढ़हीन (कमजोर चरित्र या रीढ़विहीन) व्यक्तियों का प्रतीक है, जो बिना अपने विवेक के दूसरों के इशारों पर नाचते हैं।
उमा का चरित्र
उमा इस एकांकी की मुख्य पात्र है जो आधुनिक शिक्षित, साहसी और आत्मविश्वासी लड़की का प्रतिनिधित्व करती है, जो विवाह के बाजार में बिकने वाली वस्तु बनने से इंकार कर देती है।
रामस्वरूप की विवशता
उमा के पिता रामस्वरूप आधुनिक विचारों के समर्थक हैं लेकिन सामाजिक दबाव के कारण अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाने का प्रयास करते हैं, जो समाज के दोहरे चरित्र को दिखाता है।
गोपालप्रसाद और शंकर का चरित्र
गोपालप्रसाद और उनका बेटा शंकर दबी-कुचली और कम पढ़ी-लिखी लड़की की तलाश में हैं, जो महिला शिक्षा के प्रति पुरुषवादी और संकीर्ण मानसिकता को उजागर करता है।
एकांकी विधा
एकांकी नाटक का एक संक्षिप्त रूप होता है जिसमें जीवन के किसी एक ही मुख्य प्रसंग या समस्या को एक ही अंक में नाटकीय ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
Important Formulas
Board Exam Info
बिहार बोर्ड (BSEB) की कक्षा 9 की परीक्षाओं में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से उमा का चरित्र-चित्रण, शीर्षक की सार्थकता, और समाज में स्त्री शिक्षा की स्थिति पर आधारित लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
इस पाठ का नाम 'रीढ़ की हड्डी' क्यों रखा गया है?
यह शीर्षक प्रतीकात्मक है। यह उन लोगों पर व्यंग्य है जो रीढ़विहीन (निडर और स्वाभिमानी नहीं) हैं, विशेषकर गोपालप्रसाद और शंकर जैसे चरित्रहीन और संकीर्ण सोच वाले पुरुषों पर।
उमा ने गोपालप्रसाद के सवालों का जवाब किस प्रकार दिया?
उमा ने बहुत ही निडरता और तार्किकता से गोपालप्रसाद को करारा जवाब दिया कि लड़कियाँ कोई भेड़-बकरी नहीं हैं जिन्हें बिकने के लिए दिखाया जाए, और लड़कों की उच्च शिक्षा के साथ लड़कियों का भी पढ़ना जरूरी है।
शंकर की क्या विशेषता और कमजोरी थी?
शंकर कॉलेज में पढ़ता था लेकिन उसका चरित्र बहुत कमजोर था, वह लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटने के कारण अपमानित हो चुका था और रीढ़ की हड्डी सीधा करके बैठने में असमर्थ था।
Learn Supplementary: Reedh ki Haddi with Your AI Tutor
10 different ways to study this chapter. Free for 3 chapters per day.
Lecture
Key Points
Interactive
Quiz
Flashcards