Class 10 Hindi - ODISHA
Poetry: Sangatkaar
कक्षा 10 ओडिशा बोर्ड (BSE) के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कविता 'संगतकार' मंगलेश डबराल द्वारा रचित है। यह कविता मुख्य गायक या कलाकार के साथ गाने वाले, वाद्ययंत्र बजाने वाले या सहयोग देने वाले 'संगतकार' के त्याग, समर्पण और उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह कविता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मुख्य कलाकार की सफलता के पीछे छिपे गुमनाम नायकों के योगदान को सराहा गया है। परीक्षाओं में इस पाठ से कविता के अर्थ, भावार्थ और संगतकार के मानवीय गुणों पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं जो छात्रों को सहानुभूति और सम्मान का पाठ पढ़ाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
संगतकार का अर्थ और भूमिका
संगतकार वह व्यक्ति होता है जो मुख्य गायक के साथ सुर में सुर मिलाकर उसकी आवाज़ को कमज़ोर नहीं पड़ने देता, बल्कि उसे संबल प्रदान करता है।
मुख्य गायक की कमज़ोरी को छिपाना
जब मुख्य गायक का गला बैठने लगता है या वह अंतरा की जटिल तानों में भटकने लगता है, तब संगतकार अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं होने देता और उसकी हिचक को छुपाता है।
संगतकार की मनुष्यता
इसे संगतकार की विफलता नहीं बल्कि उसका बड़प्पन, संयम और मानवीय गुण माना जाता है कि वह अपनी कला का प्रदर्शन करने के बजाय मुख्य गायक को आगे रखता है।
कविता का संदेश
यह कविता हमें सिखाती है कि समाज या कला क्षेत्र में पर्दे के पीछे काम करने वाले हर छोटे-बड़े सहयोगी का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उनके बिना मुख्य सफलता अधूरी है।
Important Formulas
Board Exam Info
ओडिशा बोर्ड (BSE) की कक्षा 10 की हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में कविता के अंश की व्याख्या, संगतकार की विशेषताएं और उसके त्याग पर आधारित लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न मुख्य रूप से आते हैं।
Frequently Asked Questions
कविता में 'संगतकार' किसे कहा गया है?
मुख्य गायक का साथ देते समय संगतकार अपनी आवाज़ को धीमा क्यों रखता है?
संगतकार के गायन को उसकी विफलता क्यों नहीं माना जाता?
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