Class 10 Hindi - GUJARAT

Poetry: Sangatkaar

कक्षा 10 गुजरात बोर्ड (GSEB) के हिंदी पाठ्यक्रम की कविता 'संगतकार' मंगलेश डबराल द्वारा रचित है। यह कविता मुख्य गायक के साथ गाने वाले संगतकार (सह-गायक) के त्याग, समर्पण और उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। मुख्य गायक की गूँज को प्रभावशाली बनाने में संगतकार का बहुत बड़ा योगदान होता है, फिर भी वह अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से कम रखता है। यह कविता हमें उन गुमनाम नायकों का सम्मान करना सिखाती है जो परदे के पीछे रहकर दूसरों की सफलता में अपना योगदान देते हैं। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह कविता बहुत महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

संगतकार का अर्थ

मुख्य गायक या वादक के साथ मिलकर गाने या बजाने वाला सह-गायक, जो मुख्य कलाकार के सुर में सुर मिलाता है।

मुख्य गायक की कमज़ोरी को छिपाना

जब मुख्य गायक का गला बैठने लगता है या वह भटकने लगता है, तब संगतकार अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से आगे नहीं जाने देता ताकि मुख्य गायक की असफलता छिप जाए।

मानवीय संवेदना और परोपकार

संगतकार का यह कार्य उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि उसका बड़प्पन और त्याग है जो दूसरों को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

मंगलेश डबराल की काव्यशैली

कवि ने सरल, सहज और प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग किया है जो सीधे पाठकों के मन को छू लेती है।

Important Formulas

मुख्य गायक = मुख्य कलाकार जिसकी आवाज़ को मंच पर मुख्य रूप से सुना जाता है
संगतकार = वह सहायक कलाकार जो मुख्य गायक के स्वर को संबल प्रदान करता है
त्याग और समर्पण = संगतकार के चरित्र की मुख्य विशेषता

Board Exam Info

गुजरात बोर्ड (GSEB) की कक्षा 10 की परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 3 से 4 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से संगतकार की भूमिका, उसके त्याग और कविता के केंद्रीय भाव से संबंधित लघु उत्तरीय प्रश्न और बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) शामिल होते हैं।

Frequently Asked Questions

संगतकार की मुख्य भूमिका क्या होती है?

संगतकार मुख्य गायक के सुर को थामे रखता है, उसकी आवाज़ को कमज़ोर नहीं पड़ने देता और उसके गायन को ऊँचाई तक पहुँचाने में मदद करता है।

क्या संगतकार की आवाज़ का मुख्य गायक से कम होना उसकी विफलता है?

नहीं, यह उसकी विफलता नहीं बल्कि उसका मानवीय गुण और त्याग है, जो वह अपनी इच्छा से मुख्य गायक के सम्मान को बनाए रखने के लिए करता है।

इस कविता का शीर्षक 'संगतकार' क्यों रखा गया है?

क्योंकि यह कविता पूरी तरह से उस सह-गायक को समर्पित है जो हर सफल कला के पीछे रहकर अपना अमूल्य योगदान देता है।

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