Class 9 Hindi - WEST-BENGAL
Supplementary: Reedh ki Haddi
गदीश चन्द्र माथुर द्वारा रचित एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच, स्त्री शिक्षा और विवाह जैसी गंभीर समस्याओं पर करारा व्यंग्य करती है। यह पाठ पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) के कक्षा 9 के हिंदी पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि लड़कियों की उच्च शिक्षा और उनका स्वाभिमानी होना कितना आवश्यक है। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चरित्र चित्रण, शीर्षक की सार्थकता और वैचारिक प्रश्नों पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं जो विद्यार्थियों की वैचारिक क्षमता को परखते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
रीढ़ की हड्डी (मुहावरे का अर्थ)
यहाँ 'रीढ़ की हड्डी' का सांकेतिक अर्थ 'स्वाभिमान' या 'रीढ़ विहीन' होना यानी बिना व्यक्तित्व या रीढ़ के कमजोर होना है, जो गोपालप्रसाद जैसे पाखंडी लोगों पर व्यंग्य है।
स्त्री शिक्षा का महत्व
पाठ यह जोरदार वकालत करता है कि महिलाओं को केवल घर संभालने के लिए नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने का पूरा अधिकार है।
उमा का चरित्र
उमा एक शिक्षित, साहसी और स्पष्टवादी लड़की है जो पितृसत्तात्मक सोच और रूढ़िवादी परंपराओं के सामने झुकने से इनकार कर देती है।
रामस्वरूप की विवशता
रामस्वरूप एक आधुनिक विचारों वाले पिता हैं, परंतु समाज के डर से अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाने का प्रयास करते हैं, जो उनकी दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।
गोपालप्रसाद का पाखंडी व्यक्तित्व
गोपालप्रसाद मुँह से आधुनिकता की बात करते हैं लेकिन बहू के मामले में पुरानी, दबी-कुचली और कम पढ़ी-लिखी लड़की की तलाश करते हैं जो उनका पाखंड उजागर करता है।
Important Formulas
Board Exam Info
पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) की कक्षा 9 की परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), अति लघु उत्तरीय प्रश्न और 3 से 5 अंकों वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्न जैसे उमा का चरित्र-चित्रण, शीर्षक की सार्थकता और एकांकी का संदेश शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
इस एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' इसलिए रखा गया है क्योंकि यह समाज के उन लोगों पर व्यंग्य है जिनका अपना कोई स्वाभिमान या रीढ़ (दृढ़ व्यक्तित्व) नहीं होती, जैसे गोपालप्रसाद और शंकर।
इस एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' इसलिए रखा गया है क्योंकि यह समाज के उन लोगों पर व्यंग्य है जिनका अपना कोई स्वाभिमान या रीढ़ (दृढ़ व्यक्तित्व) नहीं होती, जैसे गोपालप्रसाद और शंकर।
उमा ने शंकर और उसके पिता को क्या जवाब दिया?
उमा ने साहसपूर्वक बताया कि शंकर चरित्रहीन है, लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटता रहा है और नौकरों की तरह भागते हुए पकड़ा गया था। उसने यह भी कहा कि लड़कियों की कोई भेड़-बकरी की तरह खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती।
रामस्वरूप अपनी बेटी की शिक्षा की बात क्यों छिपाते हैं?
रामस्वरूप रूढ़िवादी समाज के डर से अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा की बात छिपाते हैं क्योंकि उन्हें डर था कि अधिक पढ़ी-लिखी लड़की को देखकर गोपालप्रसाद जैसे लोग विवाह से मना कर देंगे।
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