Class 9 Hindi - WEST-BENGAL

Supplementary: Is Jal Pralay Mein

कक्षा 9 पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) की पाठ्यपुस्तक का यह पूरक पाठ 'इस जल प्रलय में' फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित एक रोमांचक और मार्मिक रिपोर्ताज है। इस पाठ में लेखक ने 1975 में पटना में आए भीषण बाढ़ के भयावह दृश्यों और जनजीवन पर उसके प्रभाव का आंखों देखा हाल प्रस्तुत किया है। छात्र इसमें बाढ़ के दौरान लोगों की मानसिक स्थिति, राहत कार्यों, और आपदा प्रबंधन को बहुत ही संवेदनशील तरीके से समझते हैं। परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चरित्र चित्रण, बाढ़ के अनुभव और लेखक के दृष्टिकोण पर आधारित दीर्घ उत्तरीय तथा लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

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Key Concepts

रिपोर्ताज विधा

यह गद्य की एक ऐसी विधा है जिसमें किसी घटना का आंखों देखा हाल तथ्यात्मक और कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाता है।

बाढ़ का आक्रमण

पटना शहर में पानी घुसने की प्रारंभिक स्थिति और राजेंद्रनगर जैसे इलाकों में बाढ़ के पानी के प्रवेश करने का रोमांचक वर्णन।

आपदा और मानवीय संवेदना

संकट के समय लोगों की मदद करने की भावना, दुकानों से जरूरत का सामान और किताबें खरीदने की लोगों की अनोखी मानसिकता।

फणीश्वरनाथ रेणु की लेखन शैली

लेखक की भाषा आँचलिक है जो जीवंत दृश्यों को पाठकों के सामने सजीव कर देती है।

मृत्यु का तरल दूत

तेजी से बढ़ते हुए बाढ़ के पानी को लेखक ने 'मृत्यु का तरल दूत' कहा है क्योंकि यह अपने साथ तबाही लेकर आता है।

Important Formulas

रिपोर्ताज = रिपोर्ट + आख्या (घटना का जीवंत और साहित्यिक वर्णन)
आपदा प्रबंधन = बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने और राहत पहुंचाने की तैयारी
आंचलिक साहित्य = किसी विशेष क्षेत्र की संस्कृति, भाषा और जीवन शैली का चित्रण

Board Exam Info

पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBBSE) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न आते हैं। इसमें 1-2 अंकों के बहुविकल्पीय या अति लघु उत्तरीय प्रश्न और 5 अंकों का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (जैसे बाढ़ के दृश्यों का वर्णन या लेखक के अनुभवों पर आधारित) पूछा जाता है।

Frequently Asked Questions

इस पाठ का शीर्षक 'इस जल प्रलय में' क्यों रखा गया है?

क्योंकि इस पाठ में पटना शहर में आए भयंकर बाढ़ के पानी के प्रलयकारी रूप और उससे उत्पन्न तबाही का सजीव वर्णन किया गया है।

लेखक ने बाढ़ के पानी को 'मृत्यु का तरल दूत' क्यों कहा है?

बाढ़ का पानी अपने साथ विनाश, बर्बादी और मृत्यु लेकर आया था, इसलिए लेखक ने उसे 'मृत्यु का तरल दूत' कहा है।

बाढ़ की खबर सुनकर लोग किस प्रकार की तैयारी कर रहे थे?

लोग अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक सामान, स्टोव, केरोसिन तेल, पीने का पानी, मोमबत्तियां और पढ़ने के लिए कुछ किताबें जमा कर रहे थे।

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