Class 9 Hindi - RAJASTHAN
Supplementary: Reedh ki Haddi
‘रीढ़ की हड्डी’ जगदीश चंद्र माथुर द्वारा लिखित एक बहुत ही रोचक और वैचारिक एकांकी है। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य समाज में स्त्री शिक्षा के महत्व को स्थापित करना और विवाह जैसी गंभीर सामाजिक प्रक्रिया में लड़का-लड़की की समानता तथा उनकी अपनी स्वतंत्र राय के अधिकार पर जोर देना है। पाठ में रूढ़िवादी और ढकोसले वाली सोच पर करारा व्यंग्य किया गया है। राजस्थान बोर्ड (RBSE) परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चरित्र चित्रण, एकांकी के संदेश और पाठ के शीर्षक की सार्थकता से संबंधित प्रश्न अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
स्त्री शिक्षा का महत्व
पाठ यह संदेश देता है कि महिलाओं का शिक्षित होना समाज के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है, न कि उन्हें केवल घर के काम तक सीमित रखना चाहिए।
रीढ़ की हड्डी का प्रतीकात्मक अर्थ
यहाँ 'रीढ़ की हड्डी' का अर्थ रीढ़विहीन या चरित्र और व्यक्तित्व के बलहीन लोगों से है, जो बिना रीढ़ (आत्मसम्मान) के समाज में दूसरों के इशारों पर चलते हैं।
रूढ़िवादिता पर व्यंग्य
लेखक ने विवाह के समय लड़की दिखाने की औपचारिकता और रूढ़िवादी सोच रखने वाले अभिभावकों की मानसिकता पर तीखा व्यंग्य किया है।
उमा का साहसी व्यक्तित्व
उमा एक आधुनिक, शिक्षित और आत्मसम्मान से परिपूर्ण लड़की है जो बिना डरे अन्यायी और दबी-कुचली सोच वाले लोगों को करारा जवाब देती है।
गोपालप्रसाद और शंकर का चरित्र
यह चरित्र दिखाते हैं कि कैसे कुछ लोग उच्च शिक्षा प्राप्त करके भी दबे-कुचले और ओढ़ी हुई आधुनिकता के पीछे पुरानी सोच रखते हैं।
Important Formulas
Board Exam Info
राजस्थान बोर्ड (RBSE) परीक्षा में इस पाठ से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से एकांकी के संदेश, शीर्षक की सार्थकता, उमा का चरित्र चित्रण और गोपालप्रसाद के व्यंग्यात्मक संवादों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
इस पाठ का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' क्यों रखा गया है?
'रीढ़ की हड्डी' शरीर का वह भाग है जो हमें सीधा खड़ा रखता है। पाठ में इसे प्रतीकात्मक रूप में इस्तेमाल किया गया है, जो गोपालप्रसाद और उनके बेटे शंकर जैसे चरित्रों के आत्मसम्मान और व्यक्तित्व की कमजोरी को दर्शाता है जिनके पास अपना कोई दृढ़ दृष्टिकोण नहीं है।
उमा कौन है और उसका चरित्र कैसा है?
उमा इस एकांकी की मुख्य पात्र और एक शिक्षित, साहसी तथा आत्मविश्वासी लड़की है। वह अन्याय को चुपचाप सहने के बजाय उसका विरोध करना जानती है और विवाह के समय बिना डरे अपनी बेबाक राय रखती है।
गोपालप्रसाद उच्च शिक्षा के संबंध में क्या विचार रखते हैं?
गोपालप्रसाद उच्च शिक्षा को लेकर दोहरी मानसिकता रखते हैं। वे लड़कों के लिए उच्च शिक्षा को जरूरी मानते हैं, लेकिन लड़कियों की उच्च शिक्षा के सख्त खिलाफ हैं क्योंकि वे नहीं चाहते कि लड़कियां उनके बराबर समझदार या अधिकार संपन्न बनें।
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