Class 9 Hindi - RAJASTHAN
Poetry: Vaakh
कक्षा 9 राजस्थान बोर्ड (RBSE) के पाठ्यक्रम में शामिल पाठ 'वाख' प्रसिद्ध कश्मीरी कवयित्री ललद्यद द्वारा रचित हैं। 'वाख' का अर्थ कश्मीरी शैली की चार पंक्तियों वाली कविता है। इन रचनाओं में कवयित्री ने ईश्वर की प्राप्ति के लिए किए जा रहे अपने प्रयासों की व्यर्थता, सांसारिक मोह-माया से मुक्ति और सच्चे ज्ञान की खोज पर प्रकाश डाला है। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को यह सीखने को मिलता है कि ईश्वर कण-कण में व्याप्त हैं और धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर ही मनुष्य सच्चे भक्त बन सकता है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ व्याख्या और महत्वपूर्ण प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
वाख का अर्थ और परिचय
वाख ललद्यद की लोकप्रिय शैली है, जो कश्मीरी भाषा के लोक-जीवन से जुड़ी चार पंक्तियों में लिखी गई काव्यात्मक शैली है।
कच्चे सकोरे की डोर
कवयित्री ने मनुष्य के जीवन और उसके शरीर की नश्वरता को 'कच्चे सकोरे' के रूप में दर्शाया है, जिस पर प्रभु-भक्ति की कच्ची डोर से सांसें टिकी हैं।
सुषम और नाड़ी (हठयोग)
सुषम्णा नाड़ी को जागृत करने के लिए हठयोग का सहारा लिया जाता है, लेकिन कवयित्री के अनुसार जीवन के अंत में भवसागर पार करने के लिए कोई सत्कर्म रूपी 'माझी' को देने के लिए कुछ नहीं बचता।
साहब (ईश्वर) की सर्वव्यापकता
ललद्यद ने संदेश दिया है कि ईश्वर घट-घट में बसता है। हिंदू और मुसलमान का भेद करना व्यर्थ है, क्योंकि सच्चा ज्ञानी वही है जो स्वयं को पहचानता है।
अंतःकरण की शुद्धि (संभावी)
मनुष्य को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। जब मन और इंद्रियां नियंत्रित होंगी तभी अंतःकरण के द्वार खुलेंगे और संभावी (समान भाव रखने वाला) बन सकेंगे।
Important Formulas
Board Exam Info
राजस्थान बोर्ड (RBSE) परीक्षा में इस पाठ से लगभग 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें गद्यांश/पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कवयित्री के भाव स्पष्ट करने वाले प्रश्न तथा वैचारिक बोध पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न मुख्य रूप से आते हैं।
Frequently Asked Questions
कवयित्री ललद्यद ने 'कच्चे सकोरे' किसे कहा है और क्यों?
कवयित्री ने मनुष्य के शरीर और जीवन को 'कच्चे सकोरे' कहा है, जो कमजोर होते हैं और जिन पर समय बीतने के साथ आयु कम होती जाती है।
ललद्यद के अनुसार सच्चे ज्ञान की पहचान क्या है?
ललद्यद के अनुसार सच्चा ज्ञान वही है जो मनुष्य को हिंदू और मुसलमान के भेदभाव से ऊपर उठाकर आत्म-ज्ञान और ईश्वर की सर्वव्यापकता से अवगत कराए।
जेगि (सुषम) सेतु का क्या उद्देश्य होता है?
हठयोग के माध्यम से सुषम्णा नाड़ी को साधने का प्रयास किया जाता है, लेकिन कवयित्री मानती हैं कि वास्तविक मुक्ति सत्कर्मों और अहंकार त्यागने से ही मिलती है।
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