Class 9 Hindi - RAJASTHAN

Supplementary: Is Jal Pralay Mein

कक्षा 9 राजस्थान बोर्ड (RBSE) की पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग 1 का यह पाठ 'इस जल प्रलय में' फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित एक रिपोर्ताज है। इस पाठ में लेखक ने सन् 1967 में पटना में आए भयानक बाढ़ के अपने प्रत्यक्ष अनुभव का बहुत ही सजीव और मर्मस्पर्शी चित्रण किया है। पाठ में बाढ़ के आने, उससे उत्पन्न होने वाली आपदा, लोगों की मानसिक स्थिति, और राहत कार्यों का यथार्थ वर्णन किया गया है। यह पाठ छात्रों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है और परीक्षा की दृष्टि से मानवीय संवेदनाओं व रिपोर्ताज लेखन शैली को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

रिपोर्ताज विधा

यह गद्य की एक ऐसी विधा है जिसमें किसी घटना का आंखों देखा हाल तथ्यात्मक और कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाता है।

बाढ़ का दृश्य और जनजीवन

सन् 1967 की पटना की बाढ़ का वर्णन करते हुए लेखक ने बताया है कि कैसे पानी शहर के रेजिडेंशियल एरिया में घुसने लगा था और लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे थे।

मृत्यु का तरल दूत

लेखक ने बढ़ते हुए बाढ़ के पानी को 'मृत्यु का तरल दूत' कहा है क्योंकि यह अपने साथ विनाश और मौत लेकर आ रहा था।

लेखक का व्यक्तिगत अनुभव

लेखक खुद बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में रहे और उन्होंने शरणार्थियों की परेशानियों, बच्चों की तड़प और लोगों की जिज्ञासा को बहुत करीब से देखा।

आपदा के समय मानवीय संवेदनाएं

संकट की घड़ी में किस प्रकार लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और कुछ लोग आपदा में भी मनोरंजन या कौतूहल ढूंढते हैं, इसका सुंदर चित्रण किया गया है।

Important Formulas

रिपोर्ताज = रिपोर्ट + आत्मकथात्मक शैली (घटना का यथार्थ चित्रण)
प्राकृतिक आपदा = मानवीय जीवन और संपत्ति का भारी नुकसान
लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु ( आंचलिक कथाकार )

Board Exam Info

राजस्थान बोर्ड (RBSE) परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से बाढ़ के भयानक दृश्यों, लेखक के अनुभवों, रिपोर्ताज की विशेषता और आपदा प्रबंधन से जुड़े मूल्यपरक (Value-based) प्रश्न पूछे जाते हैं।

Frequently Asked Questions

इस पाठ की विधा 'रिपोर्ताज' है और इसके लेखक आंचलिक कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु हैं।

इस पाठ की विधा 'रिपोर्ताज' है और इसके लेखक फणीश्वरनाथ रेणु हैं।

लेखक ने 'मृत्यु का तरल दूत' किसे कहा है और क्यों?

लेखक ने बाढ़ के लगातार बढ़ते हुए पानी को 'मृत्यु का तरल दूत' कहा है क्योंकि यह पानी अपने साथ तबाही, बर्बादी और मौत लेकर आ रहा था।

बाढ़ आने पर पटना के कुछ लोग भयभीत थे और सुरक्षित स्थानों पर जा रहे थे, वहीं कुछ लोग कौतूहलवश बाढ़ का दृश्य देखने के लिए इकट्ठा हो रहे थे।

कुछ लोग भयभीत होकर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे थे, जबकि कई लोग कौतूहलवश बाढ़ का पानी देखने और उस पर चर्चा करने के लिए सड़कों पर एकत्र थे।

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