Class 9 Hindi - PUNJAB

Supplementary: Reedh ki Haddi

‘रीढ़ की हड्डी’ जगदीश चंद्र माथुर द्वारा लिखित एक बहुत ही प्रसिद्ध एकांकी (नाटक) है, जो समाज की रूढ़िवादी सोच और पितृसत्तात्मक मानसिकता पर करारा व्यंग्य करती है। यह पाठ कक्षा 9 के पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के पाठ्यक्रम में शामिल है। इस एकांकी के माध्यम से लेखक ने स्त्री शिक्षा के महत्व को दर्शाया है और यह संदेश दिया है कि विवाह जैसी संस्था में लड़के और लड़की की समानता और आपसी सहमति सबसे ऊपर होनी चाहिए। बोर्ड परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह पाठ नैतिक मूल्यों, चरित्र चित्रण और समाज सुधार के विषयों पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न लेकर आता है।

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Key Concepts

एकांकी का अर्थ

एक ऐसा नाटक जिसमें केवल एक ही अंक या दृश्य होता है और जो जीवन के किसी एक विशेष पहलू या समस्या को उजागर करता है।

स्त्री शिक्षा का महत्व

पाठ में यह जोर दिया गया है कि लड़कों की तरह लड़कियों का भी उच्च शिक्षित होना उतना ही आवश्यक है, न कि केवल घर के काम-धंधे तक सीमित रहना।

रीढ़ की हड्डी मुहावरे का अर्थ

यहाँ 'रीढ़ की हड्डी न होना' का प्रतीकात्मक अर्थ रीढ़हीन, बेसहारा या रीढ़विहीन होना है, जो गोपालप्रसाद और उनके बेटे शंकर जैसे चरित्रों की रीढ़विहीन और आत्मसम्मानहीन प्रवृत्ति को दर्शाता है।

रूढ़िवादी सोच पर प्रहार

लड़की देखने के समय उसके गुणों और शिक्षा के बजाय उसे वस्तु की तरह परखने की पुरानी और दकियानूसी सोच का कड़ा विरोध किया गया है।

उमा का चरित्र और आत्मसम्मान

उमा एक शिक्षित, साहसी और आधुनिक विचारों वाली लड़की है जो अपनी बेइज्जती चुपचाप सहने के बजाय रूढ़िवादी मेहमानों को करारा जवाब देती है।

Important Formulas

स्त्री शिक्षा = समाज के विकास की नींव
आत्मसम्मान + निर्भीकता = सशक्त व्यक्तित्व
लड़का और लड़की की समानता = स्वस्थ समाज का आधार

Board Exam Info

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस पूरक पुस्तक (Supplementary) के अध्याय से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से एकांकी के शीर्षक की सार्थकता, उमा का चरित्र चित्रण, और गोपालप्रसाद के चरित्र पर आधारित लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली रूढ़ियों को दूर करना, स्त्री शिक्षा का समर्थन करना और विवाह के समय लड़कियों के प्रति दोहरे मापदंडों का विरोध करना है।

इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य समाज में स्त्री शिक्षा के महत्व को समझाना तथा विवाह के समय लड़कियों को एक वस्तु की तरह देखने वाली रूढ़िवादी सोच पर चोट करना है।

एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' क्यों रखा गया है?

यह शीर्षक प्रतीकात्मक है। रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा रखती है। इसी प्रकार, व्यक्ति का आत्मसम्मान और चरित्र उसकी 'रीढ़ की हड्डी' होता है। गोपालप्रसाद और शंकर जैसे लोग जो समाज में दोहरे मापदंड रखते हैं, वास्तव में चरित्र और व्यक्तित्व के मामले में 'रीढ़विहीन' (कमजोर) हैं।

उमा ने बताया कि वह कॉलेज में पढ़ी है, कोई भेड़-बकरी नहीं है जिसे लोग बिना सोचे-समझे खरीद लें। उसने शंकर के चरित्र और उसकी हरकतों का पर्दाफाश करते हुए गोपालप्रसाद के घमंड को तोड़ दिया।

उमा ने गोपालप्रसाद को बताया कि वह उच्च शिक्षित है और अपने अधिकारों को जानती है। उसने शंकर के चरित्रहीन स्वभाव और उसकी पढ़ाई की सच्चाई सबके सामने लाकर रूढ़िवादी सोच वाले लोगों को करारा जवाब दिया।

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