Class 9 Hindi - PUNJAB
Prose: Lhasa ki Aur
पाठ 'ल्हासा की ओर' राहुल सांकृत्यायन द्वारा रचित एक प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत है। यह रचना लेखक की सन 1929-30 में नेपाल के रास्ते तिब्बत की यात्रा पर आधारित है। उस समय भारतीयों को तिब्बत यात्रा की अनुमति नहीं थी, इसलिए लेखक को एक विषारी (भिखारी) के वेश में यात्रा करनी पड़ी थी। इस पाठ में तिब्बत की भौगोलिक स्थिति, वहाँ के समाज, संस्कृति, रास्ते की कठिनाइयों और आतिथ्य-सत्कार का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे हर साल सारांश, पात्र परिचय और बोध प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
यात्रा-वृत्तांत
यह गद्य की वह विधा है जिसमें लेखक अपनी किसी यात्रा का आँखों देखा हाल, वहाँ के अनुभव, लोगों और संस्कृति का रोचक वर्णन करता है।
राहुल सांकृत्यायन का परिचय
इन्हें हिंदी यात्रा साहित्य का पितामह माना जाता है। इनका मूल नाम केदार पांडेय था और इन्होंने बहुमुखी रचनाएँ की हैं।
तिब्बत की सामाजिक स्थिति (खुलापन)
तिब्बत में उस समय पर्दा प्रथा या जाति-पाँति जैसी कुरीतियाँ नहीं थीं। चोर-डकैतों का भय होने के बावजूद वहाँ हथियारबंद कानून न होने के कारण यात्रियों को सहायता मिल जाती थी।
डाँडा (पहाड़ी दर्रे)
तिब्बत की यात्रा में सबसे ऊँचे और खतरनाक स्थान 'डाँडे' कहलाते थे, जो समुद्र तल से 16-17 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित होते हैं।
सुमति (मित्र)
सुमति लेखक के सहयात्री और मंगोल भिक्षु थे, जो पूरे तिब्बत में बहुत लोकप्रिय थे और उनके कई यजमान थे।
Important Formulas
Board Exam Info
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस पाठ से लगभग 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य रूप से पाठ का सारांश, लेखक का परिचय, तिब्बत की सामाजिक व्यवस्था और 'डाँडे' के रास्ते की कठिनाइयों से संबंधित लघु उत्तरीय प्रश्न परीक्षा में बार-बार आते हैं।
Frequently Asked Questions
लेखक को भिखारी के वेश में यात्रा क्यों करनी पड़ी?
क्योंकि उस समय भारतीयों को तिब्बत यात्रा करने की कानूनी अनुमति नहीं थी, इसलिए सुरक्षा और यात्रा को सफल बनाने के लिए उन्हें भिखारी का छद्म वेश धारण करना पड़ा।
तिब्बत के रास्ते की सबसे बड़ी कठिनाई क्या थी?
समुद्र तल से 16-17 हजार फीट की ऊँचाई वाले 'डाँडे' पार करना और वहाँ हथियारबंद डाकुओं का भय होना, क्योंकि उस देश में खून-खराबे के लिए कानून का डर नहीं था।
सुमति एक मंगोल भिक्षु थे जो लेखक के सहयात्री बने। तिब्बत में उनके बहुत सारे यजमान और परिचित थे, जिससे लेखक को रास्ते में ठहरने की जगह और आदर-सत्कार आसानी से मिल गया।
Learn Prose: Lhasa ki Aur with Your AI Tutor
10 different ways to study this chapter. Free for 3 chapters per day.
Lecture
Key Points
Interactive
Quiz
Flashcards