Class 9 Hindi - PUNJAB

Supplementary: Is Jal Pralay Mein

पाठ 'इस जल प्रलय में' फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध रिपोर्ताज है। इस पाठ में लेखक ने सन् 1975 में पटना में आए भीषण बाढ़ के मानवीय और सामाजिक प्रभावों का सजीव और मार्मिक चित्रण किया है। लेखक ने अपनी आँखों देखी घटनाओं के आधार पर दिखाया है कि जब प्रकृति का प्रकोप यानी 'जल प्रलय' आता है, तो जनजीवन कैसे अस्त-व्यस्त हो जाता है, लोग कैसे सुरक्षित स्थानों की तलाश करते हैं और विपदा के समय मानवीय संवेदनाएँ कैसे उभर कर आती हैं। पंजाब बोर्ड (PSEB) की परीक्षा के दृष्टिकोण से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन और संवेदनशीलता की समझ मिलती है।

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Key Concepts

रिपोर्ताज विधा

यह गद्य की एक ऐसी विधा है जिसमें किसी घटना का आँखों देखा और सजीव वर्णन किया जाता है, जो रिपोर्ट और कहानी का मिला-जुला रूप होता है।

आपदा का मानवीय पक्ष

बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय आम लोगों, गरीबों और बच्चों पर क्या बीतती है और लोग किस प्रकार एक-दूसरे की मदद करते हैं, इसका वर्णन किया गया है।

लेखक का व्यक्तिगत अनुभव

फणीश्वरनाथ रेणु ने स्वयं पटना में बाढ़ के पानी को अपनी आँखों से बढ़ते हुए देखा और अपने मित्रों के साथ राहत कार्यों का अनुभव साझा किया।

बाढ़ की भयावहता

पटना शहर में पानी घुसने के दृश्यों, लोगों में मची अफरा-तफरी और सुरक्षित ठिकानों की तलाश का अत्यंत जीवंत चित्रण किया गया है।

Important Formulas

रिपोर्ताज: आँखों देखी घटना का कलात्मक और सत्यनिष्ठ वर्णन
प्राकृतिक आपदा: मानव नियंत्रण से बाहर की घटना जैसे बाढ़, सूखा या भूकम्प
संवेदना: दूसरों के दुःख को महसूस करने की मानवीय क्षमता

Board Exam Info

पंजाब बोर्ड (PSEB) कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस पाठ से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से पाठ के सारांश, बाढ़ के दृश्यों और लेखक के अनुभवों पर आधारित दीर्घ उत्तरीय या लघु उत्तरीय प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

'इस जल प्रलय में' पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक फणीश्वरनाथ रेणु हैं।

लेखक ने पटना में बाढ़ आने का क्या कारण बताया है?

लेखक ने बताया है कि लगातार बारिश के कारण गंगा, पुनपुन और सोन नदियों का पानी शहर में घुस आया था जिससे भीषण बाढ़ आ गई।

बाढ़ के समय लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी?

बाढ़ के समय कुछ लोग डरे हुए थे, कुछ लोग स्थिति का जायजा लेने नाव से घूम रहे थे और कई लोग राहत सामग्री जुटाने में मदद कर रहे थे।

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