Class 9 Hindi - PUNJAB
Prose: Ek Kutta aur Ek Maina
कक्षा 9 पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक का यह पाठ 'एक कुत्ता और एक मैना' प्रसिद्ध लेखक हजारीप्रसाद द्विवेदी जी द्वारा रचित एक संवेदनशील निबंध है। इस पाठ में लेखक ने पशु-पक्षियों के प्रति मानवीय करुणा, प्रेम और उनकी निष्ठा को बहुत ही सुंदर ढंग से दर्शाया है। लेखक शांतिनिकेतन के वातावरण का वर्णन करते हुए एक अंधी कुतिया और एक मैना के माध्यम से यह समझाते हैं कि कैसे मूक जीव भी इंसानों की तरह स्नेह और संवेदनाओं को समझते हैं। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पद्यांश/गद्यांश की व्याख्या और चरित्र चित्रण से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
पाठ का मुख्य उद्देश्य
यह पाठ मनुष्य और पशु-पक्षियों के बीच के आत्मीय संबंधों को उजागर करता है और मूक जीवों के प्रति दया भाव रखने की प्रेरणा देता है।
कुत्ते की निष्ठा और मूक प्रेम
लेखक और शांतिनिकेतन के अन्य लोगों के प्रति एक बीमार और अंधी कुतिया का बिना किसी स्वार्थ के प्रतिदिन आना और स्नेह जताना उसकी सच्ची निष्ठा को दर्शाता है।
मैना का अखाड़े में उतरना
लेखक ने एक विशेष मैना का जिक्र किया है जो गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की उपस्थिति में उनके आसन के पास आकर बैठ जाती थी और अपनी गर्दन हिलाकर भाव प्रकट करती थी।
शांतिनिकेतन का प्राकृतिक वातावरण
पाठ में शांतिनिकेतन के शांत, सुंदर और प्रकृति के करीब रहने वाले परिवेश का सजीव चित्रण किया गया है जहाँ मनुष्य और पशु-पक्षी एक साथ सद्भाव से रहते हैं।
लेखक हजारीप्रसाद द्विवेदी की शैली
लेखक की भाषा सरल, सहज, भावात्मक और संस्कृतनिष्ठ है जो पाठकों के मन को सीधे छू लेती है।
Important Formulas
Board Exam Info
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस चैप्टर से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, लेखक का परिचय, और पाठ के मुख्य विचारों (जैसे कुत्ते और मैना का स्वभाव) पर आधारित लघु उत्तरीय व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं।
Frequently Asked Questions
पाठ 'एक कुत्ता और एक मैना' के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध निबंधकार और आलोचक आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी हैं।
कुत्ता लेखक के प्रति अपना प्रेम कैसे प्रकट करता था?
कुत्ता बिना किसी लालच के रोज चुपचाप आता था, लेखक की आहट पहचानता था और अपनी मूक आँखों से स्नेह व्यक्त करता था।
मैना गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के प्रति कैसी भावना रखती थी?
मैना गुरुदेव के प्रति अत्यंत सहज और निश्चिंत भाव रखती थी, उनके सामने आकर बैठ जाती थी और उनकी बातें सुनने का प्रयास करती प्रतीत होती थी।
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