Class 9 Hindi - KERALA
Supplementary: Is Jal Pralay Mein
इस अध्याय 'इस जल प्रलय में' के लेखक फणीश्वरनाथ रेणु हैं। यह एक रिपोर्ताज है जिसमें पटना में सन 1975 में आए भीषण बाढ़ (जल प्रलय) का आँखों देखा हाल वर्णित है। लेखक ने बाढ़ के पानी के प्रवेश करने, लोगों की मानसिक स्थिति, राहत कार्यों और अपने व्यक्तिगत अनुभवों का अत्यंत जीवंत चित्रण किया है। केरल (SCERT) कक्षा 9 हिंदी पाठ्यक्रम का यह पाठ छात्रों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है और संकट के समय मानवीय एकता, संवेदनशीलता तथा जीवन संघर्ष को समझने की प्रेरणा देता है। परीक्षा की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संदर्भ सहित व्याख्या और लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
रिपोर्ताज (Reportage)
यह गद्य की एक ऐसी विधा है जिसमें किसी घटना का आंखों देखा और कलात्मक वर्णन किया जाता है, जो कहानी की तरह रोमांचक और सच्चाई के करीब होता है।
बाढ़ का आतंक और मानवीय प्रतिक्रिया
जब पटना शहर में पुनपुन और गंगा का पानी बढ़ने लगा, तो लोगों में किस प्रकार अफरा-तफरी मची और सुरक्षित स्थानों की तलाश में कैसे भगदड़ हुई, इसका यथार्थ चित्रण किया गया है।
मृत्यु का तरल दूत
लेखक ने बढ़ते हुए बाढ़ के पानी को 'मृत्यु का तरल दूत' कहा है क्योंकि यह पानी अपने साथ विनाश, भुखमरी और मौत लेकर आया था।
आपदा के समय मानवीय संवेदनाएँ
बाढ़ के दौरान कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए चिंतित थे, वहीं कुछ लोग नावों पर ट्रांजिस्टर, सिगरेट और पाठ्यपुस्तकें लेकर बाढ़ का आनंद लेते हुए भी दिखे, जो मानव स्वभाव के विभिन्न पक्षों को दर्शाता है।
ऐतिहासिक बाढ़ का स्मरण
लेखक ने सन 1967 की बाढ़ का भी स्मरण किया है जब उन्होंने राजेंद्र नगर क्षेत्र में पानी घुसने पर स्वयं राहत कार्य किए थे और भुखमरी का सामना किया था।
Important Formulas
Board Exam Info
केरल (SCERT) कक्षा 9 हिंदी परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से पाठ के सारांश, बाढ़ के दृश्यों का वर्णन, 'मृत्यु का तरल दूत' कथन का आशय, और आपदा प्रबंधन से जुड़े विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
इस पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस पाठ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका से परिचित कराना और संकट के समय मानवीय संवेदनाओं व एकजुटता का महत्व समझाना है।
लेखक ने बाढ़ के पानी को 'मृत्यु का तरल दूत' क्यों कहा है?
बाढ़ का पानी अपने साथ भयंकर तबाही, बेघर होना, बीमारियाँ और मौत लेकर आता है, इसलिए लेखक ने बहते हुए विनाशकारी पानी को 'मृत्यु का तरल दूत' कहा है।
इस पाठ की विधा क्या है?
यह पाठ 'रिपोर्ताज' विधा में लिखा गया है, जो पत्रकारिता और साहित्य का एक अनूठा मिश्रण है।
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