Class 12 Hindi - PUNJAB
Poetry: Usha
कक्षा 12 पंजाब (PSEB) बोर्ड परीक्षा के लिए शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित कविता 'उषा' प्रकृति के अद्भुत और गतिशील सौंदर्य का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती है। इस कविता में कवि ने भोर (सुबह) के समय आकाश में होने वाले परिवर्तनों का बहुत ही सूक्ष्म और सुंदर शब्दों में वर्णन किया है। सूर्योदय से ठीक पहले आसमान का रंग नीला, फिर शंख जैसा पवित्र, राख से लिपा हुआ चौका और अंत में केसरिया और लालिमा से युक्त होना—इन सभी दृश्यों को कवि ने ग्रामीण परिवेश के उपमानों के माध्यम से दर्शाया है। यह कविता बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें से काव्यांश की व्याख्या, सौंदर्य बोध और भाव सौंदर्य से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
प्रातः कालीन आकाश का रंग
कवि ने भोर के आकाश की तुलना 'निसल शंख' से की है, जो नीला और पवित्र दिखाई देता है।
राख से लिपा हुआ चौका
ग्रामीण जीवन की झलक देते हुए कवि कहता है कि सुबह का आसमान ऐसा लगता है मानो किसी ने राख से चौका (रसोई का स्थान) लीप दिया हो, जिस पर नमी और सफेदी का आभास होता है।
काली सिल और केसर
सुबह की हल्की लालिमा और अंधेरे के मिश्रण को समझाने के लिए कवि ने 'काली सिल' पर 'लाल केसर' पीसने का सुंदर ग्रामीण बिंब इस्तेमाल किया है।
स्लेट पर लाल खड़िया चाक
नीले आसमान पर सूर्य की पहली किरणें ऐसे बिखरती हैं जैसे किसी बच्चे ने काली स्लेट पर लाल खड़िया चाक मल दी हो।
जादू का टूटना
जैसे-जैसे सूर्य पूरी तरह उगता है और दिन का प्रकाश फैलता है, वैसे-वैसे उषा का यह जादुई और सम्मोहक सौंदर्य धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।
Important Formulas
Board Exam Info
पंजाब (PSEB) कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में इस कविता से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सप्रसंग व्याख्या, काव्यांश का सौंदर्य बोध (काव्य सौंदर्य) और कवि के परिचय से जुड़े प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
इस कविता के रचयिता शमशेर बहादुर सिंह हैं और इसका मुख्य विषय सूर्योदय से ठीक पहले के प्राकृत सौंदर्य का वर्णन करना है।
इस कविता के रचयिता शमशेर बहादुर सिंह हैं और इसका मुख्य विषय सूर्योदय से ठीक पहले के प्राकृत सौंदर्य का वर्णन करना है।
कवि ने भोर के आकाश के लिए कौन-से ग्रामीण उपमानों का प्रयोग किया है?
कवि ने राख से लिपा हुआ चौका, काली सिल, लाल केसर और स्लेट पर लाल खड़िया चाक जैसे ग्रामीण और घरेलू जीवन से जुड़े उपमानों का प्रयोग किया है।
'बहुत काली सिल जरा लाल केसर से कि स्ख दी हो' पंक्ति का क्या आशय है?
इस पंक्ति का आशय यह है कि रात के बचे हुए काले अंधेरे (काली सिल) पर सुबह की पहली लाल किरणें (लाल केसर) ऐसी प्रतीत होती हैं मानो कोई वस्तु उस पर पीसी जा रही हो।
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