Class 12 Hindi - MP
Prose: Bazaar Darshan
जैनेंद्र कुमार द्वारा लिखित निबंध 'बाज़ार दर्शन' कक्षा 12वीं (MPBSE) की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'रोहतास भाग 2' का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पाठ है। इस पाठ में लेखक ने बाजार की जादुई ताकत, 'परचेजिंग पावर' (खरीदने की शक्ति) और बाजारवाद के मनोविज्ञान का बहुत ही सुंदर और तार्किक विश्लेषण किया है। यह पाठ हमें सिखाता है कि बाजार की चमक-दमक के आगे अपनी वास्तविक आवश्यकताओं को पहचानना क्यों जरूरी है। मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ वैचारिक प्रश्नों, आशय स्पष्ट करने और गद्यांश आधारित प्रश्नों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे हर साल परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
बाजार का जादू
बाजार की आकर्षण शक्ति को 'जादू' कहा गया है जो रूप-रंग के जरिए ग्राहक को अपनी ओर खींचता है और जेब खाली होने पर भी चीजें खरीदने के लिए मजबूर कर देता है।
परचेजिंग पावर (क्रय शक्ति)
व्यक्ति की खरीदने की शक्ति या पैसे की ताकत, जिसका प्रदर्शन लोग बाजार में अपनी हैसियत दिखाने और फालतू सामान खरीदने के लिए करते हैं।
बाजार का सार्थक उपयोग
बाजार का असली उपयोग वही व्यक्ति जानता है जिसे यह पता होता है कि उसे वास्तव में क्या चाहिए, यानी 'ज़रूरत' के समय सही सामान खरीदना।
भगत जी का चरित्र
चूर बेचने वाले भगत जी 'बाजारूपन' से मुक्त हैं। उन पर बाजार का जादू नहीं चलता क्योंकि उनका मन संतुष्ट रहता है और वे मोह-माया से दूर रहते हैं।
बाजारूपन
जब ग्राहक बाजार को देखकर अपनी जरूरत के हिसाब से नहीं बल्कि केवल दिखावे और कपट के कारण सामान खरीदता है, तो बाजार में 'बाजारूपन' बढ़ता है जो समाज के लिए हानिकारक है।
Important Formulas
Board Exam Info
मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से पाठ के अंत में दिए गए अभ्यास प्रश्न, 'बाजार का जादू क्या है?', 'भगत जी का चरित्र चित्रण' और गद्यांश का आशय स्पष्ट करने वाले प्रश्न सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
Frequently Asked Questions
लेखक के अनुसार बाजार का जादू आंखों के रास्ते काम करता है। जब हम सजे-धजे बाजार में जाते हैं, तो आकर्षक वस्तुएं हमें अपनी ओर आकर्षित करती हैं और हम जरूरत न होने पर भी उन्हें खरीदने के लिए विवश हो जाते हैं।
लेखक के अनुसार बाजार का जादू आंखों के रास्ते काम करता है। जब हम सजे-धजे बाजार में जाते हैं, तो आकर्षक वस्तुएं हमें अपनी ओर आकर्षित करती हैं और हम जरूरत न होने पर भी उन्हें खरीदने के लिए विवश हो जाते हैं।
बाजारूपन से क्या अभिप्राय है?
बाजारूपन का अर्थ है कि बाजार में केवल कपट, दिखावा और आवश्यकता से अधिक सामान बेचने-खरीदने की प्रवृत्ति का हावी होना। इससे ग्राहक और व्यापारी दोनों का नैतिक पतन होता है।
भगत जी पर बाजार का जादू इसलिए नहीं चलता क्योंकि उनका मन पूर्णतः संतुष्ट और संयमित है। उन्हें केवल अपने चूर्ण की निश्चित आय चाहिए और वे पैसे के लालच या दिखावे से कोसों दूर रहते हैं।
भगत जी पर बाजार का जादू इसलिए नहीं चलता क्योंकि उनका मन पूर्णतः संतुष्ट और संयमित है। उन्हें केवल अपने चूर्ण की निश्चित आय चाहिए और वे पैसे के लालच या दिखावे से कोसों दूर रहते हैं।
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