Class 12 Hindi - MP
Poetry: Usha
कक्षा 12वीं मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) की वितान या अंतरा भाग-2 पाठ्यपुस्तक में संकलित 'उषा' कविता प्रगतिशील कवि शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित एक अत्यंत सुंदर और बिम्बात्मक रचना है। इस कविता में कवि ने भोर (सूर्योदय से ठीक पहले के समय) के आकाश में होने वाले गतिशील और मनमोहक परिवर्तनों का बहुत ही सूक्ष्म और जीवंत वर्णन किया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें प्रकृति के मानवीकरण, नए बिम्बों (प्रतीकों) के प्रयोग और शमशेर की विशिष्ट काव्य-शैली से संबंधित सप्रसंग व्याख्या तथा लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
प्रातः कालीन आकाश का रंग
कवि ने भोर के आकाश की तुलना नीले शंख और राख से लीपे गए चौके से की है, जो ग्रामीण परिवेश की सादगी को दर्शाता है।
लाल केसर और खड़िया का बिम्ब
सुबह की हल्की लालिमा को 'लाल केसर' और आसमान पर बिखरी सफेद रोशनी को 'मसल दी गई खड़िया' के रूप में चित्रित किया गया है।
काले सिलेट पर लाल खड़िया चाक
यह बहुत ही सुंदर उपमा है जहाँ काला आकाश सिलेट जैसा और उगता हुआ सूरज उस पर लाल खड़िया से मलने जैसा प्रतीत होता है।
प्रकृति का मानवीकरण
कविता में प्रकृति के रूपों को ऐसे दर्शाया गया है मानो कोई सजीव मानवी क्रिया चल रही हो, जैसे राख लीपना या स्लेट पर लिखना।
शमशेर बहादुर सिंह की काव्य शैली
कवि को 'कवियों का कवि' कहा जाता है; इनकी भाषा में चित्रमयता, बिम्बधर्मिता और संगीतत्मकता का अनूठा समन्वय मिलता है।
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Board Exam Info
मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) की कक्षा 12वीं हिंदी परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कवि परिचय और 'प्रातःकाल के नभ की तुलना किससे की गई है?' जैसे बोधात्मक प्रश्न परीक्षा में अक्सर आते हैं।
Frequently Asked Questions
कविता 'उषा' में सुबह के आकाश की तुलना नीले शंख, राख से लीपे गए चौके, लाल केसर और काली स्लेट से की गई है।
कविता 'उषा' में सुबह के आकाश की तुलना नीले शंख, राख से लीपे गए चौके, लाल केसर और काली स्लेट से की गई है।
भोर का जादू क्यों टूटने लगता है?
जैसे-जैसे सूर्य पूरी तरह उदय होता है और सूर्य की तेज किरणें फैलती हैं, वैसे-वैसे भोर का धुंधलका और उसका जादुई सौंदर्य समाप्त होने लगता है।
शमशेर बहादुर सिंह को किस प्रकार का कवि माना जाता है?
शमशेर बहादुर सिंह को प्रगतिशील एवं प्रयोगवादी धारा का कवि तथा बिम्बधर्मिता और चित्रोपम भाषा के कारण 'कवियों का कवि' माना जाता है।
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