Class 12 Hindi - HARYANA
Prose: Shram-Vibhajan aur Jaati-Pratha
कक्षा 12 हरियाणा बोर्ड (BSEH) के हिंदी पाठ्यक्रम में संकलित 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' प्रसिद्ध चिंतक बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'एनिहिलेशन ऑफ कास्ट' का हिंदी रूपांतरण है। इस पाठ में लेखक ने भारतीय समाज में व्याप्त जाति-प्रथा की विसंगतियों, दोषों और श्रम-विभाजन के नाम पर अस्वाभाविक वर्गीकरण पर करारा व्यंग्य किया है। यह पाठ बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वैचारिक समझ पर आधारित लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, जो सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण को परखते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा का संबंध
लेखक के अनुसार, जाति-प्रथा केवल श्रम-विभाजन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य का ऐसा विभाजन है जो सभ्य समाज में स्वाभाविक नहीं माना जा सकता क्योंकि यह जन्म के आधार पर तय होता है।
रुचिकर और अरुचिकर कार्य
जाति-प्रथा मनुष्य को जीवनभर के लिए एक पेशे में बांध देती है, भले ही उसकी उस कार्य में रुचि हो या न हो, जिससे व्यक्ति की कार्यक्षमता और प्रेरणा समाप्त हो जाती है।
लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप
डॉ. अंबेडकर के अनुसार लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।
स्वाधीनता, समानता और भ्रातृत्व
एक आदर्श समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिए कि कोई भी परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक संचारित हो सके, जिसे भाईचारा या भ्रातृत्व कहा गया है।
जाति-प्रथा के आर्थिक दुष्प्रभाव
संकट और परिवर्तन के समय जब मनुष्य को भूखों मरने की नौबत आ जाए, तब भी जाति-प्रथा उसे पेशा बदलने की अनुमति नहीं देती, जो आर्थिक दृष्टि से एक हानिकारक व्यवस्था है।
Important Formulas
Board Exam Info
हरियाणा बोर्ड (BSEH) की कक्षा 12वीं की परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में पाठ के सारांश, डॉ. अंबेडकर के विचारों, जाति-प्रथा के दुष्प्रभावों तथा बहुविकल्पीय (MCQ) व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आने की अधिक संभावना रहती है।
Frequently Asked Questions
लेखक ने श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा को एक दूसरे का पर्याय क्यों नहीं माना है?
श्रम-विभाजन स्वाभाविक होता है जो मनुष्य की योग्यता पर आधारित है, जबकि जाति-प्रथा अस्वाभाविक है क्योंकि यह जन्म पर आधारित होती है।
आदर्श समाज के निर्माण में भाईचारे की क्या भूमिका है?
भाईचारे से समाज में स्वतंत्रता और समानता की भावना मजबूत होती है और समाज का प्रत्येक अंग एक-दूसरे के संपर्क में रहता है।
यह पाठ मूल रूप से किस भाषण का अंश है?
यह पाठ डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'एनिहिलेशन ऑफ कास्ट' (जाति भेद का उच्छेद) का लल्लईसिंह यादव द्वारा किया गया हिंदी अनुवाद है।
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