Class 12 Hindi - HARYANA

Prose: Pahelwaan Ki Dholak

फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था, कला और इंसान के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। यह कहानी महामारी (हैजा और मलेरिया) के दौरान व्यवस्था की लाचारी और ढोलक की आवाज़ से मिलने वाली जीवटता व ऊर्जा का अनूठा चित्रण करती है। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें से चरित्र चित्रण, लाट साहब के नाम, और ढोलक की भूमिका से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। यह ग्रामीण जीवन, लोककला और भूख-बीमारी के बीच जीने की जिजीविषा को उजागर करता है।

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Key Concepts

ल्यूटन सिंह (पहलवान)

कहानी का मुख्य पात्र जो अनाथ था, उसने पहलवानी सीखी और राजा की कृपा से 'सिंह का बच्चा' उपाधि प्राप्त की। वह ढोलक की थाप से प्रेरणा लेकर कुश्ती लड़ता था।

ढोलक की भूमिका

ढोलक की आवाज़ ('धिन धा, किलिक धा') महामारी से जूझ रहे गाँव के लोगों में जीवन का संचार करती थी और ल्यूटन को कुश्ती में लड़ने की असीम शक्ति देती थी।

व्यवस्था की संवेदनशीलता

नया राजा आने पर ल्यूटन और उसके दोनों बेटों को राजदरबार से निकाल दिया जाता है, जो सत्ता के बदलते स्वरूप और कलाकारों की उपेक्षा को दर्शाता है।

महामारी और मानवीय त्रासदी

गाँव में हैजा और मलेरिया के फैलने से रोज़ाना मौतें होती हैं। ऐसे निराशाजनक माहौल में भी ल्यूटन की ढोलक रातभर बजती रहती है।

लुटन के दोनों बेटे

महामारी के दौरान लुटन के दोनों जवान बेटों की मृत्यु हो जाती है, जिसके बाद भी वह हिम्मत नहीं हारता और ढोलक बजाता रहता है।

Important Formulas

ल्यूटन सिंह का उपनाम: 'सिंह का बच्चा'
गाँव में फैली बीमारियाँ: हैजा और मलेरिया
ढोल की आवाज़ का प्रतीक: 'जीत लूँगा, जीत लूँगा'
लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु

Board Exam Info

हरियाणा बोर्ड (BSEH) परीक्षा में इस पाठ से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs), गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या और बड़े प्रश्न (जैसे ल्यूटन का चरित्र चित्रण या ढोलक का महत्व) शामिल होते हैं।

Frequently Asked Questions

पहलवान की ढोलक कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

यह कहानी विपरीत परिस्थितियों और महामारी के बीच भी जीवन जीने की अटूट इच्छाशक्ति (जिजीविषा) और कला के प्रति समर्पण का संदेश देती है।

ल्यूटन सिंह को दरबार से क्यों निकाला गया?

नए राजकुमार ने कुश्ती के शौक के बजाय घोड़ों की रेस को प्राथमिकता दी, इसलिए उसने खर्च कम करने के लिए ल्यूटन और उसके बेटों को दरबार से बाहर कर दिया।

अंत में ढोलक की आवाज़ क्यों बंद हो गई?

जब महामारी की चपेट में आकर ल्यूटन के दोनों बेटों की मृत्यु हो गई और गाँववालों ने भी उसकी उपेक्षा करनी शुरू कर दी, तब एक रात ढोलक की आवाज़ आनी बंद हो गई।

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