Class 10 Hindi - UP

Prose: Naubatkhane Mein Ibadat

Naubatkhane Mein Ibadat is a biographical sketch written by Yatindra Mishra about the legendary Shehnai maestro Bharat Ratna Ustad Bismillah Khan. The chapter explores his deep connection with his birthplace Dumraon, his devotion to music, and the traditional cultural heritage of Varanasi. It highlights how Bismillah Khan practiced his art with pure devotion, considering his music as a form of worship (ibadat). For Uttar Pradesh (UPMSP) Class 10 students, this chapter is important from the board exam perspective as it tests comprehension of values, cultural heritage, and character sketches.

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Key Concepts

उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ (Ustad Bismillah Khan)

भारत के महान शहनाई वादक जिन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।

डुमरांव का महत्व (Importance of Dumraon)

बिस्मिल्ला ख़ाँ का जन्म बिहार के डुमरांव में हुआ था और शहनाई बजाने में उपयोग होने वाली रीड़ 'रीड' (Redreed) यहीं की नरकट घास से बनाई जाती थी।

काशी और बालाजी मंदिर (Kashi and Balaji Temple)

काशी बिस्मिल्ला ख़ाँ की संगीत साधना का केंद्र था जहाँ वे बालाजी के मंदिर के टोपखाने में रियाज़ करने जाते थे।

संगीत और इbadat (Music and Worship)

लेखक ने बताया है कि बिस्मिल्ला ख़ाँ के लिए संगीत साधना ही सच्ची इबादत थी और वे धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को मानते थे।

मुहर्रम का शोक (Mourning of Muharram)

बिस्मिल्ला ख़ाँ मुहर्रम के महीने में ख़ास शोक मनाते थे और उनकी आँखों से देश के प्रति और संगीत के प्रति आदर झलकता था।

Important Formulas

बिस्मिल्ला ख़ाँ का जन्म: सन 1916 (डुमरांव, बिहार)
भारत रत्न सम्मान: सन 2001
प्रमुख वाद्य यंत्र: शहनाई
लेखक: यतींद्र मिश्र

Board Exam Info

उत्तर प्रदेश (UPMSP) कक्षा 10 हिंदी बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में लेखक का जीवन परिचय, गद्यांश पर आधारित प्रश्न और पाठ के सारांश या बिस्मिल्ला ख़ाँ के व्यक्तित्व से जुड़े लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर आते हैं।

Frequently Asked Questions

पाठ का शीर्षक 'नौबतखाने में इबादत' का क्या अर्थ है?

नौबतखाने का अर्थ वह स्थान है जहाँ बैठकर संगीत बजाया जाता है, और इबादत का अर्थ प्रार्थना या पूजा है। इसका तात्पर्य है कि संगीत साधना ही लेखक और बिस्मिल्ला ख़ाँ के लिए ईश्वर की सच्ची आराधना थी।

बिस्मिल्ला ख़ाँ को शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?

क्योंकि शहनाई को मंगल कार्यों (जैसे विवाह आदि) में बजाया जाता है और बिस्मिल्ला ख़ाँ ने पूरी दुनिया में इस वाद्य यंत्र को प्रतिष्ठित किया।

बोर्ड परीक्षा के लिए इस पाठ से किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?

इस पाठ से गद्यांश की व्याख्या, बिस्मिल्ला ख़ाँ के काशी प्रेम और उनके सादे जीवन से संबंधित लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।

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