Class 10 Hindi - BIHAR
Poetry: Jantantra ka Janm
कक्षा 10 बिहार बोर्ड (BSEB) गोधूलि भाग 2 के अंतर्गत 'जनतंत्र का जन्म' राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित एक अत्यंत महत्वपूर्ण कविता है। इस कविता में कवि ने सदियों से सोई हुई भारत की जनता के जागने और अपनी ताकत को पहचानकर स्वयं राजसिंहासन पर बैठने का आह्वान किया है। यह कविता लोकतंत्र की स्थापना में जनता की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करती है और राजा-महारानी के पारंपरिक शासन की जगह 'जनता के तंत्र' की विजय का उद्घोष करती है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ व्याख्या और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
रामधारी सिंह 'दिनकर' का परिचय
दिनकर जी का जन्म बेगूसराय, बिहार के सिमरिया गाँव में हुआ था। उन्हें 'राष्ट्रकवि' और ओज के कवि के रूप में जाना जाता है।
जनता की शक्ति
कविता में बताया गया है कि असली ताकत राजाओं के पास नहीं बल्कि देश की आम जनता के पास होती है, जो फावड़ा और ਹल चलाती है।
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है
यह इस कविता की सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है, जिसका अर्थ है कि अब राजाओं और सामंतवादी व्यवस्था का समय समाप्त हो गया है और जनता शासन संभालने आ रही है।
लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ
कवि के अनुसार लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह जनता के अधिकारों, समानता और उनकी सर्वोच्चता का प्रतीक है।
प्रतीकात्मक भाषा
कवि ने 'मिट्टी की अबोध मूरत', 'जाड़े-पाले की कसक', और 'आग की ढेली' जैसे प्रतीकों का उपयोग करके जनता के संघर्ष और सहनशीलता को दर्शाया है।
Important Formulas
Board Exam Info
बिहार (BSEB) गोधूलि परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें से मुख्य रूप से पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, कवि का परिचय, और 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' पंक्ति का आशय स्पष्ट करने वाले दीर्घ उत्तरीय या लघु उत्तरीय प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
कविता के कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' हैं और उनका जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था।
इस कविता के कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' हैं जिनका जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था।
'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' पंक्ति का क्या आशय है?
इस पंक्ति का आशय यह है कि अब राजशाही और सामंती व्यवस्था का अंत हो चुका है। देश में जनता का शासन (लोकतंत्र) स्थापित होने जा रहा है, इसलिए सत्ताधारियों को अपना सिंहासन छोड़ देना चाहिए।
कवि ने जनता को 'abodh' (अबोध) क्यों कहा है?
कवि ने जनता को 'अबोध' इसलिए कहा है क्योंकि सदियों तक सहनशील और शांत रहने के बाद भी जनता अपनी ताकत से अनजान थी, लेकिन अब वह जाग चुकी है और व्यवस्था बदलने को तैयार है।
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