Class 10 Hindi - BIHAR

Prose: Vish ke Daant

कक्षा 10 बिहार बोर्ड (BSEB) गोधूलि भाग 2 का पाठ 'विष के दाँत' नलिन विलोचन शर्मा द्वारा रक्षित एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कहानी है। यह कहानी मध्यमवर्ग के अंतर्विरोधों, अमीरी-गरीबी के भेद और पितृसत्तात्मक मानसिकता पर करारा प्रहार करती है। सेन साहब के कारखाने के नए चमचमाते लाल रंग की स्ट्रीम कार और उनके बेटे खोखा (कसूमा) तथा गरीब ड्राइवर की बेटी मदन के बीच का संघर्ष इस पाठ का मुख्य केंद्र है। बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से यह कहानी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पात्रों के चरित्र-चित्रण और वैचारिक प्रश्नों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

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Key Concepts

सेन साहब का परिवार और अहंकार

सेन साहब एक अमीर और दबंग व्यक्ति हैं जो अपने जीवन में नियमों के पाबंद हैं और अपने बेटे खोखा को इंजीनियर बनाना चाहते हैं, जो उनके अहंकार का प्रतीक है।

खोखा (कसूमा) का चरित्र

खोखा सेन साहब का इकलौता बेटा और घर का 'दडला' (लाड़-प्यार में बिगड़ा हुआ) बच्चा है, जिसे कोई नियम मानने की छूट है और वह भविष्य का 'इंजीनियर' माना जाता है।

मदन और गिरधर लाल

गिरधर लाल सेन साहब के कारखाने में एक साधारण क्लर्क है और मदन उसका साहसी तथा विद्रोही स्वभाव वाला बेटा है, जो खोखा के अहंकार को चुनौती देता है।

विष के दाँत का प्रतीकात्मक अर्थ

कहानी में 'विष के दाँत' उन लोगों के प्रतीक हैं जो समाज में अपनी ताकत और धन के बल पर दूसरों का शोषण करते हैं, और मदन द्वारा खोखा के दो दाँत तोड़ देना इस वर्ग-संघर्ष की जीत है।

मध्यवर्गीय समाज और रूढ़िवादिता

यह कहानी दर्शाती है कि कैसे माता-पिता का अंधा प्यार बच्चों को बिगाड़ देता है और अमीरी-गरीबी का फर्क समाज में असमानता पैदा करता है।

Important Formulas

लेखक: नलिन विलोचन शर्मा
विधा: मनोवैज्ञानिक कहानी
पात्र: सेन साहब, खोखा (कसूमा), मदन, गिरधर लाल, सोफ़ा, आरती, रजनी, आलो
पुस्तक: गोधूलि भाग 2 (बिहार बोर्ड कक्षा 10)

Board Exam Info

बिहार (BSEB) गोधूलि परीक्षा में इस पाठ से वस्तुनिष्ठ (Objective) और लघु उत्तरीय (Short Answer) प्रश्न मिलाकर लगभग 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से शीर्षक की सार्थकता, मदन और खोखा का चरित्र-चित्रण तथा कहानी के संदेश पर प्रश्न बार-बार आते हैं।

Frequently Asked Questions

इस कहानी का शीर्षक 'विष के दाँत' क्यों रखा गया है?

यह शीर्षक खोखा (कसूमा) के उस अभिमानी और आतंकपूर्ण स्वभाव का प्रतीक है, जिसे मदन ने उसके दो दाँत तोड़कर यानी उसका 'विष' निकालकर शांत कर दिया था।

सेन साहब के परिवार में लड़कियों और लड़कों के पालन-पोषण में क्या अंतर था?

लड़कियों को घर के नियम-कानून और कठपुतली की तरह जीने की ट्रेनिंग दी जाती थी, जबकि खोखा को हर गलती की छूट थी और उसके लिए कोई नियम नहीं था।

मदन ने खोखा की पिटाई क्यों की थी?

जब मदन ने सेन साहब की नई कार को सिर्फ छूने की कोशिश की, तो खोखा ने उसे धकेल दिया। इसके बाद मदन ने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए खोखा से मुकाबला किया और उसके दो दाँत तोड़ दिए।

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