Class 9 Hindi - ODISHA

Supplementary: Reedh ki Haddi

‘रीढ़ की हड्डी’ जगदीश चंद्र माथुर द्वारा रचित एक अत्यंत प्रासंगिक एकांकी है जो समाज में स्त्री शिक्षा और विवाह जैसी कुप्रथाओं पर करारा व्यंग्य करती है। इस पाठ में विवाह के समय लड़कियों की उच्च शिक्षा को छिपाने की मानसिकता और रूढ़िवादी सोच को बेनकाब किया गया है। ओडिशा बोर्ड (BSE) की परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चरित्र चित्रण, शीर्षक की सार्थकता और सामाजिक संदेश से जुड़े दीर्घ उत्तरीय तथा लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। यह छात्रों को समाज सुधार के प्रति जागरूक करता है।

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Key Concepts

एकांकी विधा

एकांकी नाटक का एक संक्षिप्त रूप होता है जिसमें जीवन के किसी एक ही महत्वपूर्ण पक्ष, घटना या समस्या को एक ही अंक में प्रस्तुत किया जाता है।

स्त्री शिक्षा का महत्व

पाठ में यह दर्शाया गया है कि महिलाओं का शिक्षित होना समाज के विकास और उनके अपने आत्मसम्मान के लिए कितना आवश्यक है।

रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य

लड़के वालों की पुरानी और दकियानूसी सोच तथा आधुनिक व समझदार लड़की (उमा) के बीच के संघर्ष को बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' का प्रतीकात्मक अर्थ

यह शीर्षक व्यक्तित्व के रीढ़विहीन (आत्मसम्मानहीन और रीढ़ की हड्डी न होने यानी झुककर चलने वाले) लोगों पर कटाक्ष है, विशेष रूप से रामस्वरूप जैसे बेबस पिताओं पर।

उमा का साहसी चरित्र

उमा एक शिक्षित, आत्मविश्वासी और साहसी लड़की है जो रूढ़िवादी और दिखावे की दुनिया के सामने झुकने से इनकार कर देती है और खरी-खरी बातें सुनाती है।

Important Formulas

स्त्री शिक्षा = समाज के विकास और सशक्तिकरण की कुंजी
रीढ़ की हड्डी का अर्थ = स्वाभिमान और व्यक्तित्व की दृढ़ता
एकांकी = एक अंक वाला नाटक जिसमें जीवन का एक विशेष उद्देश्य हो

Board Exam Info

ओडिशा बोर्ड (BSE) कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से पाठ का सारांश, उमा का चरित्र चित्रण, और शीर्षक की सार्थकता से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

Frequently Asked Questions

इस एकांकी का नाम 'रीढ़ की हड्डी' क्यों रखा गया है?

यह शीर्षक प्रतीकात्मक है जो उन लोगों पर व्यंग्य करता है जिनका अपना कोई स्वाभिमान, व्यक्तित्व या रीढ़ (दृढ़ता) नहीं होती, जैसे रामस्वरूप जैसे पिता जो अपनी बेटी के विवाह के लिए हर अपमान सहने को तैयार रहते हैं।

उमा कौन थी और उसका चरित्र कैसा था?

उमा रामस्वरूप की पुत्री थी। वह बीए पास एक शिक्षित, साहसी, आत्मविश्वासी और स्पष्टवक्ता लड़की थी जो रूढ़िवादी परंपराओं और अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाती है।

शंकर की क्या विशेषताएँ थीं?

शंकर गोपाल प्रसाद का बेटा है जो चरित्रहीन, उच्च शिक्षा के प्रति नकारात्मक सोच रखने वाला और कॉलेज में लड़कियों की तरह हरकतों के कारण बेइज्जत हो चुका एक ढोंगी युवक है।

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