Class 9 Hindi - MP
Poetry: Sawaiyon se
कक्षा 9 एमपी बोर्ड (MPBSE) की हिंदी पाठ्यपुस्तक के क्षितिज भाग 1 में संकलित 'सवैया' रसखान जी द्वारा रचित हैं। इन सवैयों में कृष्ण भक्ति, ब्रजभूमि के प्रति अगाध प्रेम और गोपियों की कृष्ण के प्रति अनन्य निष्ठा का सुंदर चित्रण किया गया है। रसखान जी का कृष्ण और उनकी लीला-भूमियों से इतना गहरा लगाव है कि वे अगले जन्म में भी ग्वाल-बाल, पशु या पत्थर के रूप में ब्रज में ही जन्म लेना चाहते हैं। यह अध्याय छात्रों को हिंदी साहित्य की कृष्ण-भक्ति धारा से परिचित कराता है और बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से व्याख्या तथा सप्रसंग उत्तर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
सवैया छंद की विशेषता
सवैया एक वर्णिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 22 से 26 वर्ण होते हैं। यह ब्रजभाषा का एक अत्यंत लोकप्रिय और मधुर छंद है।
रसखान का ब्रज-प्रेम
कवि का कृष्ण के प्रति समर्पण भाव इतना प्रबल है कि वे मनुष्य, पशु, पक्षी या पहाड़ किसी भी योनि में जन्म लें, लेकिन उनकी इच्छा ब्रज में ही रहने की है।
कृष्ण की लकुटी और कामरिया
कवि तीनों लोकों का सुख त्यागकर कृष्ण की लाठी (लकुटी) और कंबल (कामरिया) को पाने के लिए तैयार हैं, क्योंकि इनसे उनका अनन्य प्रेम जुड़ा है।
गोपी का कृष्ण के प्रति अनुराग
एक गोपी कृष्ण का रूप धारण करने को तो तैयार है, लेकिन कृष्ण की मुरली को अपने होंठों पर रखने से इंकार कर देती है क्योंकि मुरली उसे अपनी सौतन जैसी लगती है।
ब्रजभाषा का माधुर्य
इन सवैयों में सहज, स्वाभाविक और प्रवाहमयी ब्रजभाषा का प्रयोग किया गया है जो मन को मोह लेती है।
Important Formulas
Board Exam Info
मध्य प्रदेश (MPBSE) बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से कुल 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें से पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या, कवि का परिचय (रसखान), और पाठ से संबंधित लघु उत्तरीय प्रश्न (जैसे- रसखान ब्रज में क्यों रहना चाहते हैं?) मुख्य रूप से आते हैं।
Frequently Asked Questions
रसखान जी का वास्तविक नाम क्या था और वे कहाँ के रहने वाले थे?
रसखान का वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था और वे दिल्ली के पास पिहानी के रहने वाले थे, बाद में ब्रज में जा बसे।
रसखान अगले जन्म में क्या-क्या बनना चाहते हैं और क्यों?
रसखान अगले जन्म में मनुष्य, ग्वाल-बाल, गाय, पहाड़ या पक्षी कुछ भी बनना चाहते हैं, बशर्ते उनका निवास ब्रजभूमि में ही हो ताकि वे कृष्ण के समीप रह सकें।
गोपी कृष्ण की मुरली को अपने होंठों पर क्यों नहीं रखना चाहती?
गोपी को लगता है कि मुरली ने कृष्ण का सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, इसलिए वह मुरली को अपनी सौतन मानती है और उसे अपने होंठों से लगाने से इंकार करती है।
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