Class 9 Hindi - GUJARAT
Supplementary: Reedh ki Haddi
कक्षा 9 गुजरात बोर्ड (GSEB) की हिंदी पाठ्यपुस्तक का पूरक पाठ 'रीढ़ की हड्डी' जगदीश चंद्र माथुर द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध एकांकी है। यह एकांकी समाज में स्त्रियों की शिक्षा, उनके अधिकारों और विवाह जैसी पारंपरिक व्यवस्था में व्याप्त रूढ़ियों पर करारा व्यंग्य करती है। इस पाठ में विवाह के समय लड़की की उच्च शिक्षा को छिपाने की मानसिकता और पितृसत्तात्मक सोच का पर्दाफाश किया गया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके प्रश्न विद्यार्थियों की वैचारिक क्षमता और समाज सुधार के दृष्टिकोण का मूल्यांकन करते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
एकांकी (One-Act Play)
एकांकी नाटक का एक संक्षिप्त रूप होता है जिसमें जीवन के किसी एक ही मुख्य घटना या समस्या को एक ही अंक में प्रस्तुत किया जाता है।
नारी शिक्षा का महत्व
पाठ यह संदेश देता है कि स्त्री का शिक्षित होना समाज के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है, न कि उसे केवल घर के काम तक सीमित रखना चाहिए।
रीढ़ की हड्डी (मुहावरे का प्रतीकात्मक अर्थ)
यहाँ 'रीढ़ की हड्डी' स्वावलंबन, आत्मसम्मान और रीढ़हीनता (कमजोर चरित्र या रीढ़ न होना) के प्रतीक के रूप में उपयोग की गई है जो रीढ़विहीन व्यक्तियों पर कटाक्ष है।
पितृसत्तात्मक सोच पर प्रहार
यह एकांकी उस दबी-कुचली मानसिकता पर प्रहार करती है जो लड़कियों को बिकाऊ माल या सजावटी वस्तु समझती है।
Important Formulas
Board Exam Info
गुजरात बोर्ड (GSEB) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस पूरक पाठ से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से एकांकी के शीर्षक की सार्थकता, पात्रों (जैसे रामस्वरूप, उमा, शंकर) के चरित्र-चित्रण और पाठ से मिलने वाले संदेश पर आधारित लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
इस पाठ का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' प्रतीकात्मक है। यह उन लोगों पर व्यंग्य है जो रीढ़विहीन (चरित्रहीन, रीढ़ की हड्डी यानी आत्मसम्मान और व्यक्तित्वहीन) हैं, जैसे कि शंकर और उसके पिता, जो खुद कोई स्टैंड नहीं ले सकते और दूसरों पर रौब जमाते हैं।
इस पाठ का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' प्रतीकात्मक है। यह उन पुरुषों के व्यक्तित्व पर करारा व्यंग्य है जिनका अपना कोई आत्मसम्मान या दृढ़ चरित्र नहीं होता, जैसे कि इस कहानी का पात्र शंकर।
उमा का चरित्र समाज को क्या संदेश देता है?
उमा का चरित्र साहसी, स्पष्टवादी और शिक्षित नारी का प्रतीक है। वह यह संदेश देती है कि लड़कियों को अपने आत्मसम्मान के साथ समझौता नहीं करना चाहिए और अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
रामस्वरूप अपनी बेटी की शिक्षा की बात क्यों छिपाते हैं?
रामस्वरूप दबी हुई और डरपोक मानसिकता के कारण अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा छिपाते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि अधिक पढ़ी-लिखी लड़की को लड़के वाले शायद पसंद न करें।
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