Class 9 Hindi - GUJARAT

Supplementary: Is Jal Pralay Mein

इस अध्याय में लेखक फणीश्वरनाथ रेणु ने 1975 की पटना की बाढ़ का सजीव और मार्मिक वर्णन किया है। 'जल प्रलय में' रिपोर्टाज शैली में लिखा गया एक ऐसा पाठ है जो हमें प्राकृतिक आपदाओं की भीषणता और उस समय मानवीय संवेदनाओं से परिचित कराता है। इस पाठ के माध्यम से छात्र यह समझते हैं कि बाढ़ आने पर किस प्रकार लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाते हैं, राहत कार्य कैसे होते हैं, और संकट की घड़ी में भी आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना कैसे जीवित रहती है। परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चरित्र चित्रण और स्थिति पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

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Key Concepts

रिपोर्टाज विधा

यह गद्य की एक ऐसी विधा है जिसमें किसी घटना का आँखों देखा और सजीव वर्णन किया जाता है, जो पत्रकारिता और साहित्य का सुंदर मेल है।

बाढ़ की विभीषिका

1975 में पटना में आई भयानक बाढ़ का यथार्थ चित्रण, जहाँ चारों तरफ पानी ही पानी था और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था।

मानवीय संवेदना और शरण

आपदा के समय लोगों का सुरक्षित स्थानों (जैसे गोलघर, एक्जीबिशन रोड आदि) पर शरण लेना और एक-दूसरे की मदद करना।

लेखक की उत्सुकता

लेखक और उनके मित्र बाढ़ के पानी को देखने और उसके प्रभाव का अनुभव करने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में घूमते हैं।

आपदा प्रबंधन और राहत

बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, पीने के पानी और दवाइयों की व्यवस्था करने तथा नावों के माध्यम से राहत पहुँचाने का संघर्ष।

Important Formulas

रिपोर्टाज: घटना का आँखों देखा और कलात्मक वर्णन
आपदा प्रबंधन: संकट के समय जान-माल की रक्षा और राहत कार्य
सहयोग की भावना: संकट में एक-दूसरे की मदद करना

Board Exam Info

गुजरात बोर्ड (GSEB) की कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से बाढ़ के दृश्य, लेखक की मनोदशा और आपदा के समय मानवीय व्यवहार पर आधारित लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

इस पाठ का नाम 'इस जल प्रलय में' क्यों रखा गया है?

क्योंकि इसमें पटना शहर में बाढ़ के पानी के भयानक प्रकोप (प्रलय) और उससे उत्पन्न तबाही का सजीव वर्णन किया गया है।

लेखक ने बाढ़ के पानी को आते देख क्या तैयारी की थी?

लेखक ने बाढ़ के पानी से बचने के लिए आवश्यक ईंधन, आलू, मोमबत्ती, दियासलाई, पीने का पानी और अपनी पसंदीदा किताबें एकत्र कर ली थीं।

बाढ़ आने पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया होती है?

बाढ़ आने पर लोग डर जाते हैं, अपना सामान समेटकर सुरक्षित ऊँचे स्थानों की ओर भागते हैं और एक-दूसरे की सहायता करने का प्रयास करते हैं।

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