Class 7 Hindi - BIHAR

Phool Aur Kaanta

कक्षा 7 बिहार बोर्ड (BSEB) की पाठ्यपुस्तक किसलय भाग-2 का पाठ 'फूल और कांटा' प्रसिद्ध कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है। इस कविता में कवि ने बहुत ही सुंदर ढंग से यह समझाया है कि जन्म एक ही पौधे पर होने के बावजूद फूल और कांटे के स्वभाव और कर्म में कितना अंतर होता है। फूल अपनी कोमलता और सुगंध से सबको आकर्षित करता है और सभी को प्रिय होता है, जबकि कांटा अपनी चुभने की आदत के कारण सबको कष्ट देता है। यह पाठ विद्यार्थियों को अच्छे आचरण, विनम्रता और श्रेष्ठ कर्मों का महत्व सिखाता है जो परीक्षा और जीवन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

एक ही उद्गम, भिन्न स्वभाव

फूल और कांटा दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं, एक ही हवा और पानी से पलते हैं, फिर भी उनके स्वभाव और गुण पूरी तरह अलग होते हैं।

फूल का परोपकारी चरित्र

फूल अपनी सुंदरता और मीठी सुगंध से सभी का मन मोह लेता है, देवताओं के सिर पर चढ़ता है और भौंरों को आश्रय देता है।

कांटे का चुभने वाला स्वभाव

कांटा सबकी उंगलियों को छेदता है, सुंदर वस्त्रों को फाड़ देता है और भंवरे के पंख कतर देता है, जो बुरे व्यवहार का प्रतीक है।

बड़प्पन और अच्छे कर्म

कवि का संदेश है कि ऊंचे कुल में जन्म लेने से कोई बड़ा नहीं बनता, इंसान अपने अच्छे कर्मों और व्यवहार से ही महान बनता है।

प्रकृति का संदेश

प्रकृति हमें सिखाती है कि हम चाहे जैसी परिस्थिति में पैदा हों, हमारे कार्य समाज के लिए कल्याणकारी होने चाहिए।

Important Formulas

सद्गुण और विनम्रता = समाज में आदर और सम्मान
बुरे कर्म और अहंकार = सबका कष्ट और तिरस्कार
श्रेष्ठ कुल में जन्म + बुरे कर्म = महत्वहीन
साधारण जन्म + श्रेष्ठ कर्म = महानता

Board Exam Info

बिहार बोर्ड (BSEB) की कक्षा 7 की हिंदी परीक्षा में इस चैप्टर से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें कविता की पंक्तियों का अर्थ, कवि का नाम, और 'फूल और कांटे के व्यवहार में क्या अंतर है' जैसे दीर्घ उत्तरीय और लघु उत्तरीय प्रश्न प्रमुख रूप से शामिल होते हैं।

Frequently Asked Questions

फूल और कांटा पाठ के रचयिता कौन हैं?

इस कविता के रचयिता प्रसिद्ध हिंदी कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जी हैं।

एक ही पौधे पर पलने के बावजूद फूल और कांटे में क्या अंतर होता है?

फूल सबको अपनी खुशबू और सुंदरता से सुख देता है और सबका प्यारा बनता है, जबकि कांटा सबको चुभता है और कष्ट पहुँचाता है।

इस कविता से हमें क्या मुख्य शिक्षा मिलती है?

यह कविता हमें सिखाती है कि ऊंचे कुल या परिवार में जन्म लेने से कोई महान नहीं बनता, इंसान अपने अच्छे कर्मों और व्यवहार से ही बड़ा बनता है।

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