Class 6 Hindi - UP

Maiya Main Nahin Makhan Khayo

कक्षा 6 हिंदी के पाठ्यक्रम में संकलित 'मैया मैं नहिं माखन खायो' पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित है। इस अध्याय में भगवान श्री कृष्ण और माता यशोदा के बीच के बाल-सुलभ संवाद का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। कृष्ण जी अपनी बालहट और मासूमियत से माखन चोरी करने की बात से साफ़ मुकर जाते हैं और अपने सखाओं पर इल्जाम लगाते हैं। यह पाठ छात्रों को वात्सल्य रस से परिचित कराता है और बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से सूरदास की भाषा-शैली तथा प्रसंग व्याख्या के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

वात्सल्य रस

बच्चों के प्रति माता-पिता या बड़ों के अगाध प्रेम और स्नेह को वात्सल्य रस कहा जाता है।

सूरदास की ब्रज भाषा

महाकवि सूरदास ने अपने पदों में मधुर और सहज ब्रज भाषा का प्रयोग किया है, जो इस कविता की मुख्य विशेषता है।

कृष्ण की बाल-लीलाएँ

भगवान कृष्ण द्वारा बचपन में की जाने वाली नटखट हरकतों और मक्खन चुराने की कथा का सजीव चित्रण।

यशोदा-कृष्ण संवाद

माता यशोदा का प्रेमपूर्ण गुस्सा और कृष्ण द्वारा भोलेपन से खुद को निर्दोष साबित करने का संवाद।

Important Formulas

वात्सल्य रस का स्थायी भाव: वत्सल अथवा स्नेह
रचयिता: महाकवि सूरदास
काव्य रूप: पद / गीत
भाषा: ब्रज भाषा

Board Exam Info

यूपी बोर्ड की कक्षा 6 की हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से किसी पद की सप्रसंग व्याख्या, कृष्ण के बाल-स्वभाव का वर्णन और कठिन शब्दों के अर्थ से संबंधित प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

इस पद के रचयिता भक्त कवि महाकवि सूरदास जी हैं।

इस पद के रचयिता भक्त कवि महाकवि सूरदास जी हैं।

श्री कृष्ण ने माखन खाने से क्यों मना किया?

श्री कृष्ण छोटे बच्चे होने के कारण अपनी मासूमियत और डर के मारे मैया यशोदा से झूठ बोल रहे थे कि उन्होंने माखन नहीं खाया है।

इस कविता में किस भाषा का प्रयोग किया गया है?

इस कविता में मधुर और सरल ब्रज भाषा का प्रयोग किया गया है।

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