Class 6 Hindi - HARYANA
Pariksha
कक्षा 6 हरियाणा बोर्ड (BSEH) की हिंदी पाठ्यपुस्तक का पाठ 'परीक्षा' प्रेमचंद जी की एक अत्यंत प्रेरणादायक कहानी है। यह कहानी हमें सिखाती है कि किताबी ज्ञान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हमारे मानवीय मूल्य, ईमानदारी, परोपकार और कर्तव्यपरायणता हैं। कहानी में दीवान सुजानसिंह और मंत्री पद के उम्मीदवार युवाओं के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि वास्तविक परीक्षा मैदान में संकट के समय दूसरों की सहायता करने और सही निर्णय लेने की होती है। बोर्ड परीक्षाओं की दृष्टि से यह पाठ नैतिक मूल्यों के विकास और गद्यांश आधारित प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
दीवान सुजानसिंह का चरित्र
दीवान सुजानसिंह रियासत के एक बूढ़े, अनुभवी और समझदार मंत्री थे जो अपने राज्य के लिए योग्य उत्तराधिकारी ढूँढ रहे थे।
छद्म रूप और परीक्षा
सुजानसिंह ने एक बूढ़े किसान का रूप धरकर उम्मीदवारों की ईमानदारी और सेवाभाव की असली परीक्षा ली थी।
पंडित जानकीनाथ की भूमिका
पंडित जानकीनाथ ने अपनी जान की परवाह न करके कीचड़ में फंसी हुई बैलगाड़ी को निकाला, जिससे उनका मानवीय गुण सामने आया।
सच्ची शिक्षा और मूल्य
पाठ यह संदेश देता है कि असली परीक्षा संकट के समय दिखाई जाने वाली इंसानियत और परोपकार की भावना में होती है।
Important Formulas
Board Exam Info
हरियाणा बोर्ड (BSEH) की छठी कक्षा की परीक्षा में इस पाठ से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें कहानी के सारांश, मुख्य पात्रों (दीवान सुजानसिंह और जानकीनाथ) के चरित्र-चित्रण और पाठ से मिलने वाली सीख पर आधारित प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
पाठ 'परीक्षा' के लेखक कौन हैं?
पाठ 'परीक्षा' के प्रसिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं।
दीवान सुजानसिंह नए मंत्री का चुनाव कैसे करना चाहते थे?
सुजानसिंह एक गुप्त परीक्षा के माध्यम से योग्य, दयालु और ईमानदार युवा का चुनाव करना चाहते थे।
कीचड़ में फंसी गाड़ी को किसने निकाला था?
पंडित जानकीनाथ ने कीचड़ में फंसी बैलगाड़ी को बाहर निकाला था।
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