Class 12 Hindi - WEST-BENGAL
Prose: Shram-Vibhajan aur Jaati-Pratha
कक्षा 12 पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा संसद (WBBSE) के हिंदी पाठ्यक्रम के अंतर्गत 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'ऐनहिलेशन ऑफ़ कास्ट' का हिंदी अनुवाद है। यह पाठ समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, असमानता और श्रम-विभाजन के नाम पर मनुष्य की स्वतंत्रता पर लगने वाले प्रतिबंधों पर तीखा प्रहार करता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे समाज सुधार, लोकतंत्र के वास्तविक स्वरूप और अंबेडकर के विचारों पर आधारित दीर्घ उत्तरीय और लघु उत्तरीय प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा का संबंध
लेखक के अनुसार, जाति-प्रथा केवल श्रम-विभाजन नहीं है, बल्कि यह सभ्य समाज में मनुष्यों का स्वाभाविक विभाजन भी है जो कार्यकुशलता के आधार पर नहीं बल्कि जन्म के आधार पर तय किया जाता है।
जाति-प्रथा के दुष्परिणाम
जाति-प्रथा मनुष्य को उसकी रुचि या क्षमता के अनुसार काम चुनने की स्वतंत्रता नहीं देती, जिससे अरुचि और विवशता के कारण कार्यक्षमता में कमी आती है।
आदर्श समाज के तीन तत्व
डॉ. अंबेडकर के अनुसार एक आदर्श समाज वह है जिसमें स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व (भाईचारा) का भाव हो और समाज में इतनी गतिशीलता हो कि कोई भी परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक आसानी से पहुँच सके।
लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ
लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।
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Board Exam Info
पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक (WBBSE) परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न आते हैं। परीक्षा में पाठ का सारांश, 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' को एक ही क्यों नहीं माना गया है, और आदर्श समाज की विशेषताओं से संबंधित दीर्घ उत्तरीय तथा वस्तुनिष्ठ (MCQ/SAQ) प्रश्न पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
लेखक ने श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा को एक क्यों नहीं माना है?
श्रम-विभाजन किसी भी सभ्य समाज की आवश्यकता है जो मनुष्य की रुचि और क्षमता पर आधारित होता है, जबकि जाति-प्रथा जन्म के आधार पर मनुष्य का निर्धारण करती है जो अरुचि और विवशता उत्पन्न करती है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार आदर्श समाज की क्या विशेषता है?
आदर्श समाज वह है जिसमें गतिशीलता हो, जो स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व पर आधारित हो और जिसमें समाज के सभी सदस्यों को सबका भाग मिले।
यह पाठ मूल रूप से किस भाषण का अंश है?
यह पाठ डॉ. अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'ऐनहिलेशन ऑफ़ कास्ट' (जाति भेद का उच्छेद) का हिंदी रूपांतरण है, जिसे ललई सिंह यादव ने 'जात-पाँत तोड़क मंडल' (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन के लिए तैयार किया था।
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