Class 12 Hindi - KARNATAKA
Prose: Pahelwaan Ki Dholak
फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा रचित कहानी 'पहलवान की ढोलक' ग्रामीण भारत की लोक-संस्कृति, भूख, महामारी और मानवीय संघर्ष का एक मर्मस्पर्शी चित्रण है। यह कहानी लुट्टन सिंह के जीवन पर आधारित है, जो अकाल और चेचक जैसी महामारियों के बीच भी अपनी ढोलक की थाप से गाँव के लोगों में जीने की उम्मीद और ऊर्जा जगाए रखता है। कर्नाटक (KSEEB) कक्षा 12 के बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें प्रतीकात्मकता, ग्रामीण समाज की विडंबना और व्यवस्था की संवेदनहीनता पर गहरे प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
लुट्टन पहलवान (मुख्य पात्र)
लुट्टन सिंह अनाथ था जिसे सास ने पाला। उसने पहलवानी सीखी और 'सिंह रफतार' को हराकर ढोलक को अपना गुरु मान लिया।
ढोलक की भूमिका
ढोलक की आवाज़ केवल मनोरंजन नहीं थी, बल्कि वह महामारी और भुखमरी से जूझ रहे निराश ग्रामीणों के मन में संजीवनी का काम करती थी।
अकाल और महामारी का प्रभाव
गाँव में हैजा और मलेरिया जैसी बीमारियों से लोग मर रहे थे। ऐसे में लुट्टन की ढोलक की आवाज़ रात के सन्नाटे को चीरकर लड़ने की प्रेरणा देती थी।
व्यवस्था परिवर्तन और उपेक्षा
नया राजकुमार आने पर लुट्टन को राजदरबार से निकाल दिया जाता है, जो कला और कलाकारों की उपेक्षा करने वाली शासन व्यवस्था को दर्शाता है।
पितृत्व और अंतिम संघर्ष
अपने दोनों बेटों की महामारी से मृत्यु के बाद भी लुट्टन ने ढोलक बजाना बंद नहीं किया, जो उसके अदम्य साहस और टूटे हुए दिल का प्रतीक है।
Important Formulas
Board Exam Info
Karnataka (KSEEB) कक्षा 12 की हिंदी बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से ढोलक की आवाज़ के प्रभाव, लुट्टन के जीवन संघर्ष, और उसके बेटों की मृत्यु के बाद उसकी मनःस्थिति पर आधारित दीर्घ उत्तरीय तथा संदर्भ सहित व्याख्या (RTC) वाले प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
लुट्टन पहलवान ने ढोलक को अपना गुरु क्यों माना?
लुट्टन ने बिना किसी गुरु के कुश्ती सीखी थी। कुश्ती के दांव-पेंच वह ढोलक की आवाज़ और उसकी थाप से सीखता और समझता था, इसलिए उसने ढोलक को अपना गुरु माना।
गाँव के लोग महामारी के समय ढोलक की आवाज़ से क्या प्रेरणा लेते थे?
ढोलक की थाप 'दां-िना, गिड़-धा' निराशा के अंधकार में जीवन की शक्ति जगाती थी और महामारी से लड़ने की एक अद्भुत ऊर्जा व हिम्मत प्रदान करती थी।
नए राजकुमार ने लुट्टन को दरबार से क्यों निकाला?
नया राजकुमार विलासी था और उसे कुश्ती के बजाय घोड़ों की रेस (पॉलो) का शौक था, इसलिए उसने लुट्टन जैसे पारंपरिक पहलवान को बिना किसी जरूरत के दरबार से हटा दिया।
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