Class 12 Hindi - CBSE-HINDI-CORE
Supplementary: Ateet Mein Dabe Paon
अतीत में दबे पाँव ओम थानवी द्वारा रचित एक यात्रा-वृत्तांत और रिपोर्टाज है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के दो प्रमुख नगरों मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की अनूठी वास्तुकला, जल-प्रबंधन और जीवनशैली पर प्रकाश डालता है। यह पाठ हमें प्राचीन भारत की नगर-नियोजन कला से अवगत कराता है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि आज की आधुनिक बस्तियाँ उस काल से क्या सीख सकती हैं। सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे विश्लेषणात्मक और मूल्यांकनात्मक प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, जो छात्रों की समझ का परीक्षण करते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
सिंधु घाटी सभ्यता का नगर नियोजन
मोहनजोदड़ो की सड़कें ग्रिड पद्धति पर बनी थीं, जो समकोण पर काटती थीं और बस्तियाँ व्यवस्थित चौकोर हिस्सों में विभाजित थीं।
जल-प्रबंधन (Water Management)
यहाँ भूमिगत जल-निकासी की बेहतरीन व्यवस्था थी, जहाँ हर घर का अपना स्नानघर और ढकी हुई नालियाँ मुख्य नाले से जुड़ी थीं।
महाकुंड (The Great Bath)
मोहनजोदड़ो का विशाल महाकुंड धार्मिक या अनुष्ठानिक स्नान के लिए बनाया गया था, जिसमें पानी के रिसाव को रोकने के लिए विशेष पक्की ईंटों और डामर का प्रयोग हुआ था।
अनाजों का विशाल कोठार
नगर में कर वसूली या आपातकालीन स्थिति के लिए अनाज के भंडारण हेतु एक विशाल अन्नागार (Granary) की व्यवस्था थी।
समाज की सादगी और अनुशासन
उत्खनन में बड़े राजमहलों या मंदिरों के अवशेष नहीं मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि यहाँ का समाज भव्यता के बजाय उपयोगिता और सादगी को महत्व देता था।
Important Formulas
Board Exam Info
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा (CBSE Hindi Core (Aroh + Vitan)) के वितान भाग से इस पाठ पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। सामान्यतः इस अध्याय से 3 से 5 अंकों के दीर्घ उत्तरीय और लघु उत्तरीय प्रश्न आते हैं, जो नगर की विशेषता, जल-प्रबंधन या सिंधु घाटी सभ्यता की भव्यता व सादगी पर केंद्रित होते हैं।
Frequently Asked Questions
मोहनजोदड़ो को 'नियोजित शहर' क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यहाँ की सड़कें, घर, नालियाँ और सार्वजनिक इमारतें एक सुनियोजित नक्शे के तहत बनाई गई थीं, जहाँ अराजकता या बेतरतीब निर्माण का नामोनिशान नहीं था।
इस पाठ का शीर्षक 'अतीत में दबे पाँव' क्या संकेत देता है?
यह शीर्षक इस बात का प्रतीक है कि लेखक ने प्राचीन खंडहरों में दबे इतिहास को बहुत ही संवेदनशीलता और धीमी गति (दबे पाँव) से महसूस किया और पुनर्जीवित किया है।
मोहनजोदड़ो सभ्यता में भव्यता क्यों नहीं दिखाई देती?
वहाँ राजाओं के महल, बड़े मंदिर या भव्य मूर्तियाँ नहीं मिली हैं; इससे प्रतीत होता है कि वह समाज ताकत के प्रदर्शन के बजाय अनुशासन, भाईचारे और सादगी पर आधारित था।
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