Class 12 Hindi - BIHAR
Prose: Shram-Vibhajan aur Jaati-Pratha
कक्षा 12 बिहार बोर्ड (BSEB) हिंदी गद्य खंड का यह पाठ 'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डा. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट' का हिंदी रूपांतरण है। इस पाठ में लेखक ने आधुनिक समाज में श्रम-विभाजन के नाम पर फैली जाति-प्रथा की कुरीतियों, अस्वाभाविक विभाजन और मानवीय स्वतंत्रता पर उसके दुष्प्रभावों का गहन विश्लेषण किया है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हर साल व्याख्या, वस्तुनिष्ठ और दीर्घउत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा का संबंध
लेखक बताते हैं कि आधुनिक समाज में कार्यकुशलता के लिए श्रम-विभाजन आवश्यक है, लेकिन जाति-प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन करती है और उन्हें जन्म से ही किसी पेशे से बांध देती है।
जाति-प्रथा एक अरुचिकर कार्य
जाति-प्रथा मनुष्य को ऐसे पेशों में धकेल देती है जो उसकी रुचि के अनुकूल नहीं होते, जिससे उसकी कार्यक्षमता घट जाती है और वह टालमटोल कर कार्य करने लगता है।
लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप
अंबेडकर जी के अनुसार लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के मिले-जुले अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।
समानता और बंधुत्व
एक आदर्श समाज में स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व (बंधुत्व) का भाव होना चाहिए, ताकि समाज के सभी सदस्यों को अपनी क्षमता विकसित करने का समान अवसर मिले।
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Board Exam Info
बिहार बोर्ड (BSEB) की 12वीं परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या और दीर्घउत्तरीय प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
इस पाठ के लेखक कौन हैं और उनका जन्म कब हुआ था?
इस पाठ के लेखक डा. भीमराव अंबेडकर हैं और उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू, मध्य प्रदेश में हुआ था।
जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन का ही रूप क्यों नहीं माना जा सकता?
क्योंकि जाति-प्रथा मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं होती, बल्कि यह माता-पिता के गर्भ के अनुसार जन्म से ही उसका पेशा तय कर देती है, जो अस्वाभाविक है।
बाबासाहेब के अनुसार आदर्श समाज की क्या विशेषता है?
आदर्श समाज वह है जिसमें स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व का भाव हो और समाज के हर वर्ग को विकास के समान अवसर मिलें।
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