Class 12 Hindi - BIHAR
Prose: Pahelwaan Ki Dholak
फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा रचित कहानी 'पहलवान की ढोलक' एक ऐसे लोक कलाकार लुटन सिंह की कहानी है जो महामारी के दौर में अपनी कला के जरिए लोगों में जीवन का संचार करता है। यह पाठ व्यवस्था की उपेक्षा, भूख, गरीबी और मौत के साये में भी जिजीविषा (जीने की इच्छा) को रेखांकित करता है। बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 12 के हिंदी पाठ्यक्रम में यह कहानी मानवीय संवेदना और ग्रामीण संस्कृति को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय से व्याख्या, चरित्र चित्रण और लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
लुटन सिंह (पहलवान)
कहानी का मुख्य पात्र जो अनाथ होने के बाद कुश्ती सीखता है और 'चटधा, गिड़धा' ढोल की आवाज़ से प्रेरणा पाकर 'सिंह व्याघ्र' को हराता है।
श्याम नगर का मेला
वह स्थान जहाँ लुटन पहलवान ने अंचल के प्रसिद्ध पहलवान चाँद सिंह को हराकर राजा साहब से 'किरमानंद' यानी 'पहलवान' की उपाधि प्राप्त की।
ढोलक की भूमिका
ढोलक की आवाज़ ('धा रक्ता, गिड़ धा रक्ता') लुटन और उसके पुत्रों के जीवन में संघर्ष की प्रेरणा और महामारी के समय निराशा दूर करने का एकमात्र साधन थी।
महामारी और विडंबना
गाँवों में हैजा और मलेरिया फैलने से रोजाना होने वाली मौतों के बीच लुटन की ढोलक रातभर बजती थी जो मरने वालों को मरणोपरांत शांति देती थी।
व्यवस्था की संवेदनहीनता
नए राजा के आते ही लुटन और उसके ढोल को राज्याश्रय से बेदखल कर दिया जाता है, जो कला और कलाकारों की उपेक्षा को दर्शाता है।
Important Formulas
Board Exam Info
बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 12 हिंदी परीक्षा में इस अध्याय से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सप्रसंग व्याख्या (Explanation), लघु उत्तरीय प्रश्न और लुटन पहलवान का चरित्र चित्रण से जुड़े प्रश्न परीक्षा में बार-2 दोहराए जाते हैं।
Frequently Asked Questions
लुटन सिंह ने कुश्ती क्यों शुरू की थी?
बचपन में माता-पिता की मृत्यु और सास द्वारा प्रताड़ित किए जाने के बाद उसने पहलवान बनने का निर्णय लिया ताकि वह अपने ऊपर होने वाले अत्याचार का बदला ले सके।
पहलवान की ढोलक क्या संदेश देती है?
यह कहानी विपरीत परिस्थितियों और मृत्यु के साये में भी हार ना मानने, संघर्ष करने और कला के माध्यम से समाज में उम्मीद जगाने का संदेश देती है।
अंत में लुटन पहलवान की मृत्यु कैसे होती है?
सर्दी और महामारी के प्रकोप के बीच जब उसके दोनों जवान बेटे मर जाते हैं, तो कुछ दिनों बाद एक रात ढोलक की आवाज़ बंद हो जाती है और सुबह उसकी लाश मिलती है।
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