Class 11 Hindi - ODISHA
Poetry: Aao Milkar Bachayein
कक्षा 11 ओड़िसा बोर्ड (BSE) की पाठ्यपुस्तक की कविता 'आओ मिलकर बचाएं' निर्मला पुतुल द्वारा रची गई है। यह कविता आदिवासी समाज की संस्कृति, सादगी और प्रकृति प्रेम को बचाने की गंभीर पुकार है। कवयित्री आधुनिकता की अंधी दौड़ में विलुप्त होती आदिवासी जीवनशैली, झारखंडी संस्कृति, और झारखंड के पहाड़ों व जंगलों के उजड़ने पर चिंता व्यक्त करती हैं। परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संदर्भ सहित व्याख्या, कवयित्री का उद्देश्य, और समाज पर पड़े आधुनिकता के प्रभाव से जुड़े प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
निर्मला पुतुल का परिचय
निर्मला पुतुल झारखंड की एक प्रमुख आदिवासी कवयित्री हैं, जिनकी कविताओं में आदिवासी जीवन के संघर्ष, दर्द और उनकी संस्कृति की सजीव झलक मिलती है।
बस्तियों को नंगा होने से बचाना
इसका अर्थ है शहरीकरण और वनों की कटाई के कारण आदिवासी बस्तियों की प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति का नष्ट होना, जिसे बचाने की अपील की गई है।
ठिठुरती ठंड में नाचने के लिए खुला आंगन
यह आदिवासी समाज की सामुदायिक भावना और कठिन परिस्थितियों में भी जीवन का आनंद लेने की उनकी पारंपरिक कला का प्रतीक है।
आधुनिकता का नकारात्मक प्रभाव
कविता में आधुनिक विकास के नाम पर हो रहे पर्यावरण के विनाश और पारंपरिक मूल्यों के ह्रास की आलोचना की गई है।
कविता का मूल संदेश
अपनी भाषा, संस्कृति, प्रकृति और मनुष्यता को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास (मिलकर बचाएं) करने का संदेश देती है यह कविता।
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Board Exam Info
ओड़िसा बोर्ड (BSE) परीक्षा में इस कविता से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न आते हैं। इसमें मुख्य रूप से काव्यांश की संदर्भ सहित व्याख्या, छोटे उत्तर वाले प्रश्न और कवयित्री के संदेश से जुड़े दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
इस कविता का मुख्य उद्देश्य आधुनिकता के दौर में खतरे में पड़ी आदिवासी संस्कृति, प्रकृति, भाषा और मानवीय मूल्यों को बचाना है।
इस कविता का मुख्य उद्देश्य आधुनिकता के दौर में खतरे में पड़ी आदिवासी संस्कृति, प्रकृति, भाषा और मानवीय मूल्यों को बचाना है।
कवयित्री ने बस्तियों को किस से बचाने की बात कही है?
कवयित्री ने बस्तियों को शहर की आबोहवा, आधुनिकता के बुरे प्रभावों और नंगा होने (संस्कृति के पतन) से बचाने की बात कही है।
इस कविता के परीक्षा में उत्तर लिखते समय किन बातों का ध्यान रखें?
उत्तर लिखते समय कवयित्री का नाम (निर्मला पुतुल), झारखंडी संस्कृति की विशेषताएं और आधुनिकता के दुष्प्रभावों को स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए।
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