Class 11 Hindi - ODISHA

Poetry: Ghar Ki Yaad

कक्षा 11 ओड़िशा बोर्ड (BSE) के छात्रों के लिए 'घर की याद' कविता भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित एक अत्यंत मर्मस्पर्शी रचना है। यह कविता कवि द्वारा जेल में बिताए गए दिनों के दौरान अपने परिवार और माता-पिता के प्रति गहरी यादों और प्रेम को दर्शाती है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह कविता बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें प्रयुक्त प्रतीकों, बिम्बों और करुण रस पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। छात्र इस पाठ के माध्यम से विरह की वेदना और पारिवारिक संबंधों की मिठास को समझते हैं, जो परीक्षा में व्याख्या और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए आवश्यक है।

Start Learning Free

Key Concepts

कारावास का संताप

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल में बंद कवि को सावन के महीने में अपने घर और परिवार की बहुत याद आती है।

पिता का व्यक्तित्व

कवि के पिता वृद्धावस्था में भी ऊर्जावान हैं, जो रोज गीता का पाठ करते हैं, दौड़ते हैं और दंड-पेल लगाते हैं।

सावन का मानवीकरण

सावन के बादलों और बारिश को कवि ने अपने संदेशवाहक के रूप में देखा है जो उसके घर जाकर संदेश दे सकते हैं।

पांचवें भाई 'भाग्यहीन' का जिक्र

कवि अपने माता-पिता के पांचवें और सबसे दुलारे पुत्र हैं, जिन्हें वे जेल में होने के कारण 'भाग्यहीन' कहते हैं।

माता का स्नेह

कवि की मां अनपढ़ होते हुए भी प्रेम की प्रतीक है, जो रात-रात भर अपने बच्चों के लिए जागती और चिंता करती है।

Important Formulas

स्मृति आधारित और आत्मकथात्मक शैली
करुण और शांत रस का प्रयोग
सहज, सरल खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग
मानवीकरण और अनुप्रास अलंकार

Board Exam Info

ओड़िशा बोर्ड (BSE) परीक्षा में इस कविता से लगभग 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें सादगीपूर्ण भाषा के अर्थ, पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या और लघु उत्तरीय प्रश्न सबसे अधिक कॉमन होते हैं।

Frequently Asked Questions

कविता में 'पांचवां भाई' कवि भवानीप्रसाद मिश्र स्वयं को कहते हैं, क्योंकि वे अपने माता-पिता के पांचवें पुत्र हैं और इस समय जेल में होने के कारण परिवार से दूर हैं।

कवि ने स्वयं को 'भाग्यहीन' कहा है क्योंकि वह अपने माता-पिता के सबसे स्नेह पाने के बावजूद उनके साथ नहीं रह सका और जेल में सजा काट रहा है।

कवि के पिता की क्या विशेषताएं थीं?

कवि के पिता वृद्धावस्था में भी बहुत फुर्तीले थे, वे रोज दंड-पेल लगाते थे, लंबी दौड़ लगाते थे, कभी थकते नहीं थे और हमेशा धार्मिक कार्यों (गीता पाठ) में लीन रहते थे।

Learn Poetry: Ghar Ki Yaad with Your AI Tutor

10 different ways to study this chapter. Free for 3 chapters per day.

Lecture

Key Points

Interactive

Quiz

Flashcards

Start Learning Free

More Hindi Chapters - ODISHA Class 11