Class 11 Hindi - HARYANA
Prose: Miyan Nasirudeen
पाठ 'मियां नसीरुद्दीन' कृष्णा सोबती द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध शब्द-चित्र है जो 'हम हुजूर आए हैं' संग्रह से लिया गया है। इस पाठ में मिया नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व, उनके मसीहाई अंदाज़ और नानबाई (रोटी बनाने वाले) कला के प्रति उनके समर्पण का बहुत ही जीवंत चित्रण किया गया है। मिया नसीरुद्दीन अपने खानदानी पेशे के इकलौते वारिस हैं और छप्पन तरह की रोटियां बनाने की कला के लिए जाने जाते हैं। यह अध्याय छात्रों को भारतीय संस्कृति के पारंपरिक हुनर, कारीगरों के संघर्ष और लेखिका की संवादात्मक शैली से परिचित कराता है, जो परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
मियां नसीरुद्दीन का व्यक्तित्व
मियां नसीरुद्दीन अपने बुजुर्गों के खानदानी हुनर पर गर्व करने वाले और अपने पेशे को सर्वोपरि मानने वाले एक स्वाभिमानी और दबंग कारीगर हैं।
नानबाई की कला
नानबाई वह व्यक्ति होता है जो तंदूर में विभिन्न प्रकार की स्वादिष्ट और जटिल रोटियां बनाने में माहिर होता है, जो मिया नसीरुद्दीन का पुश्तैनी पेशा था।
लेखिका और मियां की बातचीत
यह पाठ साक्षातकार (इरशाद) शैली में लिखा गया है जिसमें लेखिका कृष्णा सोबती ने मिया नसीरुद्दीन से उनके खानदान और रोटियां बनाने के हुनर पर तीखे और दिलचस्प सवाल पूछे हैं।
शिक्षा और हुनर का महत्व
पाठ में यह संदेश दिया गया है कि केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव और पुश्तैनी हुनर (कौशल) का भी जीवन में बहुत बड़ा महत्व होता है।
शब्द-चित्र विधा
यह गद्य की वह विधा है जिसमें शब्दों के माध्यम से किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, चेहरे-मोहरे और स्वभाव का ऐसा सजीव वर्णन किया जाता है कि वह आँखों के सामने जीवंत हो उठे।
Important Formulas
Board Exam Info
हरियाणा बोर्ड (BSEH) की कक्षा 11 की परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 4 से 6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में पाठ के सारांश, मिया नसीरुद्दीन के चरित्र-चित्रण, लेखिका के साथ उनके संबंधों और 'खानदानी नानबाई' की विशेषताओं से संबंधित लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आने की पूरी संभावना होती है।
Frequently Asked Questions
मियां नसीरुद्दीन को 'नानवाइयों का मसीहा' इसलिए कहा गया है क्योंकि वे छप्पन प्रकार की रोटियां बनाने की कला के उस्ताद हैं और अपने पुश्तैनी पेशे को बहुत गर्व के साथ जीवित रखे हुए हैं।
लेखिका कृष्णा सोबती की मिया नसीरुद्दीन से मुलाकात कैसे हुई?
लेखिका मटिया महल के गढ़ैया मोहल्ले में एक मसीहाई अंदाज़ वाले बुजुर्ग को बीड़ी पीते और मजे से बैठे देख उत्सुकतावश उनकी दुकान पर गईं और उनसे बातचीत शुरू की।
मियां नसीरुद्दीन अपने काम के बारे में क्या दृष्टिकोण रखते थे?
मियां का मानना था कि काम सीखने के लिए तालीम से ज्यादा मेहनत और उस्ताद की डांट सुनना जरूरी है, जैसे 'हुनर तो तालीम ही से आता है, वल्दियत (खानदान) से नहीं' पर उनका यह भी मानना था कि खानदानी हुनर की बात ही अलग होती है।
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