Class 11 Hindi - GUJARAT
Prose: Miyan Nasirudeen
गद्य पाठ 'मियां नसीरुद्दीन' कृष्णा सोबती जी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध संस्मरण है, जो 'शब्दचित्र' संग्रह से लिया गया है। इस पाठ में लेखिका ने मसीहाई अंदाज़ वाले नानबाई (रोटी बनाने वाले) मियां नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व, उनके खानदानी पेशे और उनके शागिर्दों के प्रति उनके विचारों का बहुत ही सजीव चित्रण किया है। यह पाठ छात्रों को यह सिखाता है कि अपने पुश्तैनी हुनर का सम्मान कैसे किया जाए और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी कला पर गर्व कैसे रखा जाए। गुजरात बोर्ड (GSEB) परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ चरित्र चित्रण और वैचारिक प्रश्नों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
मियां नसीरुद्दीन का व्यक्तित्व
मियां नसीरुद्दीन अपने पेशे के प्रति बेहद समर्पित, स्वाभिमानी और खानदानी नानबाई हैं जो छपपन किस्म की रोटियां बनाने के लिए जाने जाते हैं।
खानदानी हुनर का महत्व
पाठ में यह दर्शाया गया है कि कोई भी काम सीखने के लिए तालीम (प्रशिक्षण) से ज्यादा महत्वपूर्ण 'अमली हुनर' (प्रैक्टिकल ज्ञान) और अनुभव होता है।
लेखिका और मियां की बातचीत
लेखिका कृष्णा सोबती का मियां नसीरुद्दीन से जामा मस्जिद के पास गढ़ैया मोहल्ले की एक साधारण दुकान पर हुई मुलाकात का रोचक वर्णन है।
शागिर्दों (कामगारों) के प्रति दृष्टिकोण
मियां अपने कारीगरों को मजदूरी देते हैं और उन्हें काम सिखाने के प्रति सख्त रवैया रखते हैं ताकि रोटी बनाने की कला में कोई कमी न रहे।
भाषा शैली और शब्दचित्र
इस पाठ की भाषा अत्यंत जीवंत है जिसमें 'मियां की भाषा' और मुहावरों का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है, जो पात्र को जीवंत बनाते हैं।
Important Formulas
Board Exam Info
गुजरात बोर्ड (GSEB) की कक्षा 11 हिंदी परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में मुख्य रूप से मियां नसीरुद्दीन का चरित्र चित्रण, उनके खानदानी पेशे के प्रति गर्व, और पाठ के मुख्य संदेश से जुड़े दीर्घ उत्तरीय व लघु उत्तरीय प्रश्न आते हैं।
Frequently Asked Questions
मियां नसीरुद्दीन को 'नानवाइयों का मसीहा' क्यों कहा गया है?
क्योंकि वे 56 किस्म की रोटियां बनाने की कला में माहिर हैं और अपने पुश्तैनी पेशे के इकलौते और सबसे अनुभवी जीवित प्रतीक हैं।
लेखिका ने मियां नसीरुद्दीन की दुकान पर जाने का निर्णय क्यों लिया?
लेखिका को अंधेरी-सकरी गलियों में आटा गूंथने और रोटियां सेकने की आवाजें सुनकर जिज्ञासा हुई कि यह कौन सा दिलचस्प कारीगर है।
इस पाठ से हमें क्या मुख्य सीख मिलती है?
यह पाठ हमें सिखाता है कि हर हुनर का सम्मान करना चाहिए और बिना मेहनत या तालीम के कोई भी कला पूरी नहीं होती।
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