Class 11 Hindi - BIHAR

Supplementary: Rajasthan Ki Rajat Boondein

अध्याय 'राजस्थान की रजत बूंदें' अनुपम मिश्र द्वारा रचित एक संस्मरणात्मक रिपोर्टाज है, जो राजस्थान के मरुस्थल में पानी की भीषण कमी से निपटने के लिए अपनाई जाने वाली अनूठी पारंपरिक जल-संरक्षण तकनीक 'कुई' (बेरी) के निर्माण और उसके महत्व को दर्शाता है। इस पाठ में चंडी冈 (रेत की सतह) और पाताल पानी के बीच के अनोखे रिश्ते, चेजां (कुई खोदने वाले कारीगरों) के कौशल और मरुभूमि के जनजीवन की संघर्षगाथा का सजीव वर्णन किया गया है। बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 11 के विद्यार्थियों के लिए यह पाठ पर्यावरण संरक्षण, जल संकट और प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग को समझने की दृष्टि से परीक्षा में महत्वपूर्ण है।

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Key Concepts

कुई (बेरी)

कुई छोटे व्यास वाला एक कुआँ होता है जो मरुस्थल में वर्षा के जल को भूजल के रूप में संचित और सुरक्षित रखने के लिए बनाया जाता है।

चेजारो (कुई बनाने वाले कारीगर)

कुई के निर्माण में विशेष दक्षता रखने वाले और फावड़े का अचूक प्रहार करने वाले कुशल कारीगरों को 'चेजारो' कहा जाता है।

रेजाणी पानी

धरा की सतह के नीचे बहने वाले भूजल से अलग, रेत के कणों में नमी के रूप में रिसने वाला विशेष पानी जो पीने में मीठा और शुद्ध होता है।

पताली पानी

भूगर्भ में बहुत गहराई में पाया जाने वाला वह जल स्रोत जो अक्सर खारा होता है और मरुस्थल के निवासियों के दैनिक उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं होता।

पलर पानी

वर्षा का सीधा जल जो नदी, तालाब या सीधे जमीन पर गिरता है और जिसे बिना भूजल में मिले उपयोग किया जाता है।

Important Formulas

पलर पानी: सीधे रूप में मिलने वाला वर्षा का जल
पातालो पानी: भूतल के बहुत नीचे मिलने वाला खारा जल
रेजाणी पानी: धरातल के नीचे नमी के रूप में रिसने वाला मीठा जल

Board Exam Info

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 11 की परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से कुई निर्माण की प्रक्रिया, 'चेजारो' की भूमिका, और विभिन्न प्रकार के जल (पलर, पाताल, रेजाणी) से संबंधित लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं।

Frequently Asked Questions

कुई और कुएं में क्या अंतर है?

कुआँ बहुत बड़े व्यास का होता है और भूजल के बड़े स्रोत तक पहुँचता है, जबकि कुई छोटे व्यास (लगभग 2-3 फीट) की होती है जो मरुस्थल में रेजाणी पानी को संग्रहित करती है।

चेजारो किसे कहते हैं?

कुई खोदने और उसकी चिनाई करने वाले विशेष रूप से कुशल कारीगरों को 'चेजारो' या 'देलवाल' कहा जाता है।

राजस्थान की रजत बूंदें किसे कहा गया है?

पाठ में मरुस्थल की रेत में नमी के रूप में मौजूद उस रेजाणी पानी को 'रजत बूंदें' कहा गया है जो कठिन परिस्थितियों में जीवन का आधार बनता है।

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