Class 10 Hindi - MAHARASHTRA
Prose: Naubatkhane Mein Ibadat
कक्षा 10 महाराष्ट्र बोर्ड (MSBSHSE) के हिंदी पाठ्यक्रम का पाठ 'नौबतखाने में इबादत' यतीन्द्र मिश्र द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध व्यक्तिचित्र है। यह पाठ भारत के महान शहनाई वादक और भारत रत्न से सम्मानित उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, उनके संगीत प्रेम, सादगी और काशी की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है। इस पाठ के माध्यम से लेखक ने यह दर्शाया है कि संगीत साधना केवल कला नहीं, बल्कि एक सच्ची इबादत है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चरित्र चित्रण, जीवन मूल्य और गहराई से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्तित्व
बिस्मिल्ला खाँ सादगी, संगीत के प्रति समर्पण और अपनी मिट्टी से प्रेम करने वाले महान कलाकार थे जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
काशी की सांस्कृतिक विरासत
काशी को संगीत, संस्कृति और उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की इबादत का केंद्र माना गया है जहाँ शहनाई और बालाजी का मंदिर एक-दूसरे से जुड़े हैं।
सुशीर वाद्य और शहनाई
शहनाई को सुशीर वाद्यों (फूँक कर बजाए जाने वाले वाद्य) में 'शाहनाई' यानी वाद्ययंत्रों की रानी कहा जाता है जिसकी उत्पत्ति डुमरांव में हुई थी।
संगीत साधना और इबादत
बिस्मिल्ला खाँ के लिए संगीत बजाना और रियाज़ करना भगवान की सच्ची इबादत (पूजा) के समान था, जिसमें उनका पूरा जीवन समर्पित था।
व्यक्तिचित्र विधा
यह पाठ 'व्यक्तिचित्र' (Sketch) गद्य विधा में लिखा गया है जिसमें किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन और स्वभाव का सजीव चित्रण किया जाता है।
Important Formulas
Board Exam Info
महाराष्ट्र बोर्ड (MSBSHSE) की कक्षा 10वीं की हिंदी परीक्षा में इस पाठ से गद्यांश आधारित प्रश्न, अर्थग्रहण, और चरित्र चित्रण से संबंधित लगभग 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं।
Frequently Asked Questions
पाठ का नाम 'नौबतखाने में इबादत' क्यों रखा गया है?
नौबतखाने का अर्थ वह स्थान जहाँ शहनाई बजाई जाती है और इबादत का अर्थ प्रार्थना है। बिस्मिल्ला खाँ के लिए शहनाई बजाना ही ईश्वर की सच्ची इबादत थी।
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म कहाँ हुआ था और उनका मूल नाम क्या था?
उनका जन्म बिहार के डुमरांव में हुआ था और उनका बचपन का नाम कमरुद्दीन था।
काशी को संगीत के क्षेत्र में क्यों महत्वपूर्ण माना गया है?
काशी में पक्के गानों की कछार, बालाजी का मंदिर और संकटमोचन मंदिर जैसी पुरानी संगीत परंपराएँ हैं जहाँ बिस्मिल्ला खाँ जैसे कलाकार पैदा हुए।
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