Class 10 Hindi - MAHARASHTRA
Poetry: Sangatkaar
कक्षा 10 महाराष्ट्र बोर्ड (MSBSHSE) की पाठ्यपुस्तक का 'संगतकार' पाठ मंगलेश डबराल द्वारा रचित एक संवेदनशील कविता है। यह कविता मुख्य गायक के साथ सुर में सुर मिलाने वाले 'संगतकार' (कोसस गायक) के त्याग, समर्पण और उसकी मानवीय भूमिका पर प्रकाश डालती है। मुख्य गायक की भारी आवाज को कमजोर न पड़ने देने के लिए संगतकार अपनी आवाज को हमेशा धीमा रखता है, जिसे उसका बड़प्पन माना जाना चाहिए न कि उसकी असफलता। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह कविता छात्रों को कला जगत के पर्दे के पीछे काम करने वाले गुमनाम नायकों के महत्व को समझने और उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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संगतकार का अर्थ और भूमिका
संगतकार वह व्यक्ति होता है जो मुख्य गायक या कलाकार के साथ गाता या बजाता है, ताकि मुख्य प्रस्तुति में गहराई और प्रभाव बढ़ सके।
मुख्य गायक की सफलता में योगदान
मुख्य गायक जब अपनी सरगम की जटिलताओं में भटकता है या थक जाता है, तब संगतकार ही उसके स्वर को संभालता है और उसे बिखरने नहीं देता।
संगतकार का संकोच या विफलता
संगतकार अपनी आवाज को हमेशा मुख्य गायक से धीमा रखता है। इसे उसकी कमजोरी या असफलता नहीं, बल्कि उसका मानवीय गुण और मुख्य गायक के प्रति सम्मान समझा जाना चाहिए।
मानवीय संवेदना और परोपकार
यह कविता हमें सिखाती है कि समाज और कला क्षेत्र में कई लोग ऐसे होते हैं जो प्रसिद्धि से दूर रहकर दूसरों को आगे बढ़ाने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर देते हैं।
Important Formulas
Board Exam Info
महाराष्ट्र बोर्ड (MSBSHSE) की कक्षा 10वीं की हिंदी परीक्षा में इस पाठ से लगभग 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से काव्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न, संगतकार की विवशता या त्याग पर आधारित वैचारिक प्रश्न और कविता के केंद्रीय भाव से जुड़े प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
कविता में 'संगतकार' मुख्य गायक के साथ गाने वाले सहायक गायक को कहा गया है। उसकी भूमिका मुख्य गायक के स्वर को बल देना, उसके भटकने पर उसे संभालना और प्रस्तुति को सफल बनाना है।
कविता में 'संगतकार' मुख्य गायक के साथ गाने वाले सहायक गायक को कहा गया है। उसकी भूमिका मुख्य गायक के स्वर को बल देना, उसके भटकने पर उसे संभालना और प्रस्तुति को सफल बनाना है।
संगतकार अपने स्वर को मुख्य गायक से हमेशा धीमा क्यों रखता है?
संगतकार अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि अपने संस्कार और मुख्य गायक के प्रति सम्मान के कारण अपना स्वर धीमा रखता है ताकि मुख्य गायक की आवाज ही सर्वोपरि सुनाई दे।
संगतकार के स्वर को उसकी असफलता क्यों नहीं माना जाना चाहिए?
उसे उसकी असफलता इसलिए नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि वह अपनी मर्जी से मुख्य गायक को आगे बढ़ाने के लिए खुद को पीछे रखता है, यह उसका त्याग और महान मानवीय गुण है।
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