Class 10 Hindi - CBSE-COURSE-B
Prose: Ab Kahan Dusron ke Dukh se Dukhi Hone Wale
कक्षा 10 सीबीएसई हिंदी पाठ्यक्रम 'ब' की पुस्तक स्पर्श भाग 2 से लिया गया पाठ 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' लेखक निदा फाजली द्वारा रचित है। यह पाठ प्रकृति, जीवों और इंसानों के बीच बदलते संबंधों और संवेदनाओं पर गहरा प्रहार करता है। लेखक ने ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों (जैसे सुलेमान, नूह आदि) के माध्यम से यह समझाया है कि कैसे आधुनिकता की अंधी दौड़ में मनुष्य स्वार्थी हो गया है और वह पृथ्वी पर रहने वाले अन्य जीवों तथा पर्यावरण को नष्ट कर रहा है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ नैतिक मूल्यों और वैचारिक प्रश्नों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Start Learning FreeKey Concepts
पर्यावरण और मानवीय संवेदना
लेखक बताते हैं कि कैसे बड़े-बड़े शहरों के निर्माण और अनियंत्रित विकास के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है और इंसानों के दिलों से दूसरे जीवों के प्रति दया भाव समाप्त हो रहा है।
सुलेमान और शाहमीर का प्रसंग
पाठ में सुलेमान और अन्य ऐतिहासिक कथाओं के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा केवल इंसानों का ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों और चींटियों तक के दुखों का ध्यान रखते थे।
बदलती जीवनशैली और फ्लैट संस्कृति
बड़े शहरों में 'फ्लैट' संस्कृति के आने से घरों की छतों से कबूतरों और पक्षियों का आना-जाना बंद हो गया है, जिससे मनुष्य और प्रकृति के बीच की दूरी बहुत बढ़ गई है।
ग्वालियर से बॉम्बे का सफर
लेखक ने अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर बताया है कि कैसे ग्वालियर में उनके घर के पास एक पेड़ पर दो कबूतरों के अंडे गिरने और टूटने पर उनकी माँ और पूरे घर ने पश्चाताप किया था, जो आज के समय में असंभव सा लगता है।
Important Formulas
Board Exam Info
यह पाठ सीबीएसई हिंदी पाठ्यक्रम बी (स्पर्श भाग 2) के अंतर्गत आता है। बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसमें पाठ की मूल संवेदना, लघु उत्तरीय प्रश्न और तार्किक विश्लेषणात्मक प्रश्न (मूल्यपरक प्रश्न) शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
इस पाठ का शीर्षक 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' का क्या आशय है?
इस शीर्षक का आशय है कि आधुनिक युग में मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है कि अब वह दूसरों के दुखों को महसूस नहीं करता, जबकि पुराने समय में लोग पशु-पक्षियों और प्रकृति के प्रति भी संवेदनशील हुआ करते थे।
लेखक ने ग्वालियर के मकान और मुंबई के फ्लैट में क्या अंतर बताया है?
लेखक बताते हैं कि ग्वालियर में उनके पास बड़ा घर था जहाँ कबूतर घोंसला बनाते थे और पूरा परिवार प्रकृति के करीब था। इसके विपरीत, मुंबई के फ्लैट्स में जगह की कमी और कंक्रीट के जंगलों के कारण पक्षियों के लिए कोई स्थान नहीं बचा है।
बोर्ड परीक्षा के लिए इस पाठ से किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
बोर्ड परीक्षा में मुख्य रूप से पाठ के संदेश, लेखकों द्वारा दिए गए ऐतिहासिक उदाहरणों के महत्व, और वर्तमान समाज में मानवीय संवेदनाओं की स्थिति पर आधारित वैचारिक प्रश्न पूछे जाते हैं।
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