Class 10 Hindi - CBSE-COURSE-B
Poetry: Sakhi
कक्षा 10 सीबीएसई हिंदी कोर्स बी की पुस्तक 'स्पर्श' में संकलित संत कबीरदास की 'साखी' भक्ति काल की निर्गुण काव्यधारा की अमूल्य निधि है। इस अध्याय में कबीरदास जी के दोहों के माध्यम से मानव जीवन के नैतिक मूल्यों, सच्चे ज्ञान, अहंकार के त्याग, निंदा से बचने, और ईश्वर भक्ति के वास्तविक स्वरूप को समझाया गया है। बोर्ड परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें से दोहों के अर्थ, भावार्थ और उनके आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। यह छात्रों को जीवन में विनम्रता और सद्व्यवहार का संदेश देता है।
Start Learning FreeKey Concepts
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आप खोइ
कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य को हमेशा ऐसी मीठी और नम्र वाणी बोलनी चाहिए जो सुनने वाले को शीतलता दे और बोलने वाले के अहंकार (आप) को मिटा दे।
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूढै बन माहि
जिस प्रकार कस्तूरी मृग की नाभि में ही होती है लेकिन वह उसकी सुगंध को पाने के लिए पूरे जंगल में भटकता है, उसी प्रकार ईश्वर हर इंसान के अंदर वास करते हैं और मनुष्य उन्हें बाहर ढूंढता है।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहीं
जब तक मनुष्य के मन में 'अहंकार या मैं' की भावना रहती है, तब तक उसे ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती। अहंकार के मिटने पर ही ईश्वर के दर्शन होते हैं।
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय
कबीर जी कहते हैं कि हमारी निंदा करने वाले व्यक्ति को हमेशा अपने पास रखना चाहिए, क्योंकि वह बिना साबुन और पानी के हमारी कमियों को सुधारकर हमारे स्वभाव को निर्मल बनाता है।
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोइ
केवल मोटी-मोटी किताबें या शास्त्र पढ़ने से कोई ज्ञानी नहीं बनता। जो व्यक्ति प्रेम का एक भी अक्षर (ईश्वर या मानवता का प्रेम) समझ लेता है, वही सच्चा ज्ञानी होता है।
Important Formulas
Board Exam Info
सीबीएसई हिंदी कोर्स बी (स्पर्श भाग 2) की परीक्षा में इस अध्याय से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें दोहों के भावार्थ स्पष्ट करने, काव्यांश पर आधारित प्रश्न (MCQ या लघु उत्तरीय) तथा जीवन मूल्यों से जुड़े विश्लेषणात्मक प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
साखी का शाब्दिक अर्थ क्या है?
साखी शब्द 'साक्षी' (प्रत्यक्ष ज्ञान) का तद्भव रूप है, जो कबीर द्वारा रक्षित और अनुभव पर आधारित प्रत्यक्ष ज्ञान को दर्शाता है।
कबीर ने निंदक को पास रखने की सलाह क्यों दी है?
निंदक हमारी गलतियों और कमियों को उजागर करता है, जिससे हमें बिना किसी प्रयास के अपने स्वभाव को सुधारने का अवसर मिल जाता है।
कबीर की भाषा की क्या विशेषता है?
कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी कहा जाता है क्योंकि इसमें अवधी, राजस्थानी, भोजपुरी, पंजाबी और खड़ी बोली के शब्दों का सहज प्रयोग मिलता है।
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