Class 9 Hindi - KARNATAKA
Supplementary: Reedh ki Haddi
‘రీढ़ की हड्डी’ (Reedh ki Haddi) जगदीश चंद्र माथुर द्वारा लिखित एक एकांकी (नाटक) है जो समाज में स्त्री-शिक्षा और लैंगिक असमानता जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रहार करती है। यह पाठ कर्नाटक (KSEEB) कक्षा 9 हिंदी पाठ्यक्रम का हिस्सा है। एकांकी का केंद्रीय विषय विवाह जैसी सामाजिक प्रक्रिया में लड़कियों की स्थिति, उनके आत्मसम्मान और रूढ़िवादी सोच का विरोध करना है। परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके पात्रों के चरित्र-चित्रण (विशेषकर उमा, रामस्वरूप और गोपालप्रसाद) और वैचारिक संदेश पर आधारित प्रश्न बोर्ड परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
Start Learning FreeKey Concepts
एकांकी विधा
एकांकी नाटक का एक संक्षिप्त रूप होता है जिसमें जीवन के किसी एक ही महत्वपूर्ण पक्ष, घटना या समस्या को एक ही अंक में प्रस्तुत किया जाता है।
स्त्री-शिक्षा का महत्व
पाठ में इस बात पर जोर दिया गया है कि उच्च शिक्षा केवल लड़कों का अधिकार नहीं है, बल्कि लड़कियों का भी शिक्षित होना उतना ही आवश्यक है।
रूढ़िवादी सोच
लड़के वालों की पुरानी और संकुचित मानसिकता को दर्शाया गया है जो चाहते हैं कि बहू आज्ञाकारी और कम पढ़ी-लिखी हो।
आत्मसम्मान और साहस
पात्र 'उमा' के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि लड़कियों में भी आत्मकथा, स्वाभिमान और निर्भीकता होनी चाहिए, वे कोई बिकाऊ वस्तु नहीं हैं।
पात्र परिचय
मुख्य पात्र रामस्वरूप (उमा के पिता, जो समझौतावादी हैं), गोपालप्रसाद (दिखावटी और दंभी लड़के के पिता), शंकर (कमजोर चरित्र का लड़का) और उमा (साहसी व शिक्षित लड़की) हैं।
Important Formulas
Board Exam Info
Karnataka (KSEEB) कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा में इस पूरक पाठ से आमतौर पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से 'उमा का चरित्र-चित्रण', 'शीर्षक की सार्थकता (रीढ़ की हड्डी)', तथा लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
पाठ का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' क्यों रखा गया है?
यह शीर्षक एक व्यंग्य है जो उन पुरुषों (जैसे शंकर और गोपालप्रसाद) के चरित्र पर प्रहार करता है जिनका अपना कोई सुदृढ़ व्यक्तित्व, नैतिक मूल्य या आत्मसम्मान नहीं होता।
उमा ने गोपालप्रसाद के सवालों का जवाब किस प्रकार दिया?
उमा ने निर्भीकता से गोपालप्रसाद को करारा जवाब दिया कि लड़कियां कोई भेड़-बकरी या बिकाऊ वस्तु नहीं हैं, और उच्च शिक्षा पर केवल पुरुषों का एकाधिकार नहीं है।
रामस्वरूप का चरित्र समाज के किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है?
रामस्वरूप समाज के उस दोहरे और लाचार वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अपनी बेटी की शादी के लिए रूढ़िवादी लोगों के सामने झुक जाते हैं और अपनी बात खुलकर नहीं कह पाते।
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