Class 9 Hindi - ICSE
Prose: Maha Yagya Ka Puruskar - Yashpal
Maha Yagya Ka Puruskar is a deeply moving short story by the renowned Hindi author Yashpal, featured in the Class 9 ICSE curriculum. The chapter revolves around a poor, honest man and his wife who selflessly give away their last morsel of food to a starving stray dog, unknowingly performing the greatest yagya (sacrifice) of their lives. Yashpal beautifully highlights that true charity, compassion, and selflessness are far superior to ritualistic religious sacrifices. For board exams, this chapter is crucial for testing students' comprehension of moral values, character analysis, and the ability to answer critical thinking questions based on the narrative.
Start Learning FreeKey Concepts
निस्वार्थ सेवा और परोपकार
यह कहानी सिखाती है कि बिना किसी स्वार्थ या फल की इच्छा के भूखे और असहाय जीवों की मदद करना ही सबसे बड़ा परोपकार है।
महा यज्ञ का वास्तविक अर्थ
धार्मिक अनुष्ठानों और दान-दक्षिणा से बड़ा यज्ञ किसी जरूरतमंद या भूखे प्राणी की जान बचाना है, यही इस पाठ का केंद्रीय संदेश है।
ईमानदारी और संतोष
कथा के मुख्य पात्र (एक गरीब व्यक्ति और उसकी पत्नी) अत्यधिक गरीबी और भुखमरी के बावजूद अपनी ईमानदारी और संतोष का दामन नहीं छोड़ते।
श्रेष्ठता का पुरस्कार
श्रेष्ठ कर्मों का फल दैवीय शक्ति या अप्रत्यक्ष रूप से अवश्य मिलता है, जैसा कि सेठ को सपने में महायज्ञ के विक्रय का प्रस्ताव मिलने पर अनुभव होता है।
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Board Exam Info
ICSE Class 9 हिंदी परीक्षा में इस पाठ से सामान्यतः 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें गद्यांश आधारित संदर्भ प्रसंग व्याख्या (Reference to Context), चरित्र चित्रण (विशेषकर गरीब व्यक्ति और सेठ का), और कहानी के केंद्रीय संदेश या शीर्षक की सार्थकता पर आधारित लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल होते हैं।
Frequently Asked Questions
इस कहानी का शीर्षक इसलिए सार्थक है क्योंकि इसमें गरीब व्यक्ति द्वारा एक भूखे कुत्ते को रोटी खिलाना ही सबसे बड़ा 'महा यज्ञ' साबित होता है, जिसका उचित पुरस्कार उसे अंत में मिलता है।
इस कहानी का शीर्षक पूरी तरह सार्थक है क्योंकि इसमें एक भूखे कुत्ते को रोटी खिलाना ही सबसे बड़ा 'महा यज्ञ' साबित होता है, जिसका दिव्य पुरस्कार उस गरीब और ईमानदार व्यक्ति को मिलता है।
सेठ ने महायज्ञ का फल क्यों खरीदना चाहा?
सेठ अपनी गरीबी दूर करने के लिए यज्ञों के फल बेचने को मजबूर था और उसे लगा कि उस गरीब व्यक्ति द्वारा किए गए महायज्ञ का फल खरीदने से उसके दिन फिर जाएंगे।
यशोदानंदन या कहानी के मुख्य पात्र से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
हमें यह शिक्षा मिलती है कि दिखावे के यज्ञों से अधिक मूल्यवान गरीबों और बेसहारा जीवों की सच्ची सेवा करना है।
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